चूरू | भारत-पाकिस्तान युद्ध के महानायक लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ के सम्मान में चूरू खेल स्टेडियम का नाम अब उनके नाम पर रखा गया है। यह घोषणा उनके अदम्य साहस को श्रद्धांजलि देने के लिए की गई है।
जनरल सगत सिंह: सम्मान और संघर्ष: चूरू स्टेडियम का नाम जनरल सगत सिंह के नाम पर, पर उनके परिवार का अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष जारी
भारत के महान सैन्य रणनीतिकार लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह के सम्मान में चूरू स्टेडियम का नामकरण किया गया है, लेकिन दूसरी ओर उनका परिवार कोटा में अपनी पुश्तैनी जमीन वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
HIGHLIGHTS
- चूरू खेल स्टेडियम का नाम अब भारत-पाक युद्ध के नायक लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ के नाम पर होगा।
- जनरल सगत सिंह ने गोवा मुक्ति, नाथुला क्लैश और बांग्लादेश निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
- कोटा में उनकी 16,000 वर्ग फीट जमीन पर IOCL का पेट्रोल पंप 2007 से बिना लीज के चल रहा है।
- परिवार का आरोप है कि पेट्रोल पंप बिना एक्सप्लोसिव लाइसेंस के अवैध रूप से संचालित हो रहा है।
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कौन थे जनरल सगत सिंह?
सगत सिंह को दुनिया के महानतम सेनापतियों में गिना जाता है। उन्होंने गोवा से पुर्तगालियों, नाथुला से चीनियों और बांग्लादेश से पाकिस्तान को खदेड़ने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उनके रणनीतिक कौशल के कारण ही 1971 के युद्ध में भारत को ऐतिहासिक जीत मिली थी।
सम्मान के बीच अधिकारों की लड़ाई
एक तरफ चूरू में उनके नाम पर स्टेडियम और मूर्तियां लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनका परिवार कोटा में अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष कर रहा है। यह विडंबना ही है कि जिस योद्धा ने देश की सीमाएं बचाईं, उसके वारिस अपनी जमीन के लिए परेशान हैं।
कोटा के एरोड्रम सर्किल पर स्थित 'ओम पेट्रोल पंप' की जमीन जनरल सगत सिंह के परिवार की है। आरोप है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए है और इसे खाली नहीं कर रहा है।
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19 साल से बिना लीज के संचालन
सगत सिंह की पुत्रवधू कुमकुम सिंह के अनुसार, इस जमीन की लीज 2007 में ही समाप्त हो चुकी है। तब से परिवार लगातार जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि वे अब तक मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और पीएमओ तक अपनी शिकायत भेज चुकी हैं।
हैरानी की बात यह है कि बिना लीज और बिना वैध एक्सप्लोसिव लाइसेंस के यह पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है। परिवार का कहना है कि यदि वहां कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? प्रशासन इस पर मौन साधे हुए है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पोते सूर्यवीर सिंह, जो एक पायलट हैं, ने बताया कि वे केवल अपनी पुश्तैनी जमीन वापस चाहते हैं। उन्होंने कोटा कलेक्टर को भी पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। IOCL बहुत कम किराए पर जमीन दबाए रखना चाहता है।
क्या केवल नाम बदलना ही काफी है?
चूरू में जल्द ही उनकी प्रतिमा का अनावरण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया जाना है। सवाल उठता है कि क्या केवल स्मारकों से वीर सैनिकों का सम्मान पूरा हो जाता है? जब एक राष्ट्रभक्त परिवार अपनी ही जमीन के लिए सिस्टम से लड़ रहा हो, तो प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।