जयपुर | राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 'विकसित भारत' के संकल्प को विरासत के संरक्षण से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास तभी सार्थक है, जब हम अपनी महान परंपराओं और महापुरुषों के जीवन से जुड़े रहें।
विरासत और विकास पर राज्यपाल का संदेश: विकसित भारत के लिए विरासत का संरक्षण जरूरी: राज्यपाल
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जयपुर में महाराणा प्रताप और क्रांतिकारियों को दी शौर्यांजलि।
HIGHLIGHTS
- राज्यपाल बागडे ने कहा कि भौतिक विकास तभी सार्थक है जब हम अपनी परंपराओं से जुड़ें।
- महाराणा प्रताप को देश का पहला ऐसा स्वाधीनता सेनानी बताया जिसने मुगलों को टक्कर दी।
- इतिहास के तथ्यों पर चर्चा करते हुए 'अकबरनामा' के विवरणों पर गंभीर सवाल उठाए।
- चंद्रशेखर आजाद के वंशज अमित आजाद का सम्मान कर क्रांतिकारियों के योगदान को याद किया।
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राज्यपाल शनिवार को जयपुर के एक निजी होटल में 'द हिंदू फाउंडेशन' द्वारा आयोजित 'शौर्यांजलि' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह विशेष आयोजन महाराणा प्रताप की जयंती और 1857 की क्रांति की वर्षगांठ पर किया गया था।
महाराणा प्रताप और इतिहास का सच
बागडे ने महाराणा प्रताप को देश का पहला स्वाधीनता सेनानी बताया। उन्होंने कहा कि प्रताप ने न केवल मातृभूमि के लिए संघर्ष किया, बल्कि मुगलों को निरंतर कड़ी टक्कर देकर भारतीय शौर्य का परचम लहराया।
राज्यपाल ने 'अकबरनामा' के ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उसमें लिखा गया इतिहास पूरा सच नहीं है। उन्होंने बीकानेर की किरण देवी के साहस का प्रसंग सुनाकर सबको गौरवान्वित कर दिया।
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भारत के स्वर्णिम गौरव का इतिहास अभी विस्तार से लिखा जाना शेष है। महाराणा प्रताप और शिवाजी जैसे नायक हमारे राष्ट्र की असली पहचान और प्रेरणा के स्रोत हैं।
क्रांतिकारियों को नमन और सम्मान
कार्यक्रम में राज्यपाल ने मंगल पांडे, खुदीराम बोस और अनन्त काने जैसे बलिदानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि देशभर में हुए आंदोलनों के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में गर्व से खड़े हैं।
इस विशेष अवसर पर राज्यपाल ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के वंशज अमित आजाद का अभिनंदन किया। विधायक गोपाल शर्मा ने भी 1857 की क्रांति और राजस्थान की वीर धरा के अतुलनीय योगदान पर चर्चा की।
फाउंडेशन के संदीप गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। समारोह में भारी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने राष्ट्र प्रेम और अपनी संस्कृति के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को एक स्वर में दोहराया।
भविष्य के लिए प्रेरणा
राज्यपाल ने अंत में कहा कि महाराणा प्रताप सोलहवीं शताब्दी के महानायक थे, जबकि शिवाजी सत्रहवीं शताब्दी के गौरव। इन महापुरुषों का जीवन आलोक हमें विकसित भारत के निर्माण की दिशा में हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
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