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भारत

भारत की रूस से दोस्ती, सस्ता कच्चा तेल खरीदकर बचाए अरबों

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया। जानिए पेट्रोल-डीजल पर इसका क्या असर होगा।

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HIGHLIGHTS

  • जून में रूस से भारत का तेल आयात 40% बढ़कर 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया।
  • भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी अब लगभग 50% तक पहुंच गई है।
  • रूसी कच्चा तेल वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है।
  • मध्य पूर्व में तनाव के बीच सस्ते रूसी तेल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।
india increases cheap russian crude oil imports amid global tensions

नई दिल्ली | मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे देश को आर्थिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ी राहत मिली है।

क्यों महत्वपूर्ण है रूस से तेल का आयात?

भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से मध्य पूर्व के देशों से पूरा करता रहा है। लगभग 60 से 70 प्रतिशत तेल वहीं से आता है।

हालांकि, हाल ही में हिजबुल्लाह और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की अनिश्चितताओं ने आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

ऐसे में, भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस एक विश्वसनीय और सस्ता विकल्प बनकर उभरा है। रूसी यूराल्स ग्रेड का कच्चा तेल वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है।

यह मूल्य अंतर भारत के लिए भारी बचत का अवसर प्रदान करता है, जिससे देश का आयात बिल कम होता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटता है।

आंकड़ों में भारत का तेल आयात

ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म कैपलर (Kpler) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन (mbpd) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इस भारी वृद्धि के साथ, भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गई है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर कितना निर्भर हो गया है।

इसकी तुलना में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ दूसरे और सऊदी अरब 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

वैश्विक बाजार और भारत पर असर

मध्य पूर्व में तनाव के कारण सोमवार को ब्रेंट क्रूड 2.2% उछलकर 82.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें नरमी आई।

भारत सालाना लगभग 123 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात करता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की वृद्धि से देश का आयात बिल करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ जाता है।

सस्ता रूसी तेल भारत को इस तरह के वैश्विक मूल्य झटकों से बचाने में एक कुशन का काम करता है।

इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ का मानना है कि रूस भारत की तेल जरूरतों का एक अहम स्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता हैं, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण वैकल्पिक निर्यात मार्गों का उपयोग बढ़ रहा है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत में तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा है। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:

शहर पेट्रोल (रु./लीटर) डीजल (रु./लीटर)
नई दिल्ली ₹102.12 ₹95.20
मुंबई ₹111.21 ₹97.83
कोलकाता ₹113.47 ₹99.82
चेन्नई ₹107.87 ₹99.65

निष्कर्ष रूप में, रूस से सस्ते कच्चे तेल का बढ़ता आयात भारत के लिए एक रणनीतिक जीत है। यह न केवल देश को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचा रहा है, बल्कि अस्थिर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है।

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