नक्शे पर भारत-पाक में नया विवाद: UN में नक्शे पर भारत का रुख, पाकिस्तान ने जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र में नक्शे से जुड़े प्रस्ताव पर भारत के मतदान के बाद पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया, लेकिन पाकिस्तान ने इसे निराधार बताया।
HIGHLIGHTS
- UN में नक्शे पर प्रस्ताव के पक्ष में भारत के मतदान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई।
- पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत के दावे को निराधार बताया।
- भारत ने स्पष्ट किया कि उसका वोट किसी विशेष नक्शे या सीमा का समर्थन नहीं है।
- भारत का जोर मानचित्रों में समान क्षेत्रफल के प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर था।
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जम्मू-कश्मीर के नक्शे को लेकर भारत की स्पष्ट स्थिति सामने आने के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर इस विवाद को हवा देने की कोशिश की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली के स्पष्टीकरण को निराधार बताते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
यह मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के नक्शे को अधिक संतुलित और क्षेत्रफल के लिहाज से सटीक दिखाने से जुड़ी एक पहल के बीच उठा है।
पाकिस्तान ने भारत के रुख को किया खारिज
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी कर भारत के रुख को खारिज करने का प्रयास किया। बयान में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से संबंधित भारतीय दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है।
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यह प्रतिक्रिया नई दिल्ली द्वारा रविवार को दिए गए स्पष्टीकरण के बाद आई है, जिसने कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित उस प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य विश्व मानचित्र में महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित करना है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
इसके बाद, सोशल मीडिया और कूटनीतिक स्तर पर भारत के इस कदम को लेकर सवाल उठाए जाने लगे, जिस पर भारत को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
भारत ने दी थी यह सफाई
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि भारत का समर्थन मानचित्रों में समान क्षेत्रफल के प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत से जुड़ा था।
उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रस्ताव के पक्ष में मतदान को किसी विशेष नक्शे, प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।
भारत ने अपने मतदान को किसी भी क्षेत्रीय दावे की स्वीकृति के रूप में देखने से साफ इनकार कर दिया। नई दिल्ली का जोर इस बात पर था कि प्रस्ताव का मुख्य केंद्र कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व, यानी मानचित्र पर भौगोलिक क्षेत्रों को दिखाने के तरीके में अधिक संतुलन लाना है।
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