नई दिल्ली | भारत में सोने के प्रति लगाव केवल गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। हालांकि, हाल के वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई और बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बढ़ते आयात पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने नागरिकों से सोना खरीदने के मामले में सावधानी बरतने की विशेष अपील की है।
सोने के आयात पर सख्ती: भारत में रिकॉर्ड गोल्ड इंपोर्ट: पीएम मोदी की अपील और संकट
भारत में सोने का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क और पाबंदियां।
HIGHLIGHTS
- भारत का गोल्ड इंपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 में 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की।
- सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है।
- अप्रैल 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
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ऐतिहासिक संदर्भ और बढ़ती चिंताएं
भारत में सोने के आयात को नियंत्रित करने की कोशिशें काफी पुरानी हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने भी समय-समय पर इसके बढ़ते बोझ को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
वर्ष 1968 में इंदिरा गांधी सरकार के दौरान वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू मांग को सीमित करना था।
इसी तरह, जून 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की भावुक अपील की थी।
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वर्तमान में, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात के जरिए पूरा करता है।
विदेशी मुद्रा और रुपए पर बढ़ता दबाव
जब सोने का आयात बढ़ता है, तो देश से अधिक डॉलर बाहर जाते हैं। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने से वैश्विक बाजार में भारतीय रुपए की कीमत गिरने लगती है। इससे अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात भी महंगा हो जाता है।
व्यापार घाटा बढ़ने का एक बड़ा कारण सोने का अनियंत्रित आयात है। अप्रैल 2026 में व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया था।
सोने के आयात में हुई 84 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी ने इस व्यापार घाटे को और अधिक हवा दी है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
"सोने का बढ़ता आयात सीधे देश के विदेशी मुद्रा भंडार, रुपए की कीमत और व्यापार घाटे पर गंभीर असर डाल रहा है।"
सरकार द्वारा उठाए गए कड़े प्रतिबंधात्मक कदम
सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है।
इस कदम का उद्देश्य सोने के प्रति लोगों के आकर्षण को कम करना और घरेलू मुद्रा को मजबूती प्रदान करना है।
इसके अलावा, ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट पर भी नई पाबंदियां लगाई गई हैं। अब एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत कड़ी सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
अब कोई भी संस्था 100 किलो से अधिक सोना इस विशेष योजना के तहत आयात नहीं कर सकेगी। सरकार इसे गैर-जरूरी आयात मान रही है।
निष्कर्ष: भविष्य की आर्थिक चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आयात शुल्क से सोने की तस्करी बढ़ने की संभावना रहती है। इससे ज्वेलरी उद्योग पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए आयात पर नियंत्रण आवश्यक है। सरकार अब डिजिटल गोल्ड और अन्य निवेश विकल्पों को बढ़ावा दे रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन कड़े नियमों का भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की बचत पर क्या प्रभाव पड़ता है।
अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि सोने में निवेश के बजाय उत्पादक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना देश के दीर्घकालिक विकास के लिए अधिक फायदेमंद साबित होगा।
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