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क्रिकेट

Cricket: IPL 2013 फिक्सिंग, तौलिये और टी-शर्ट के सिग्नल से बिका मैच

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

खिलाड़ियों ने कैसे तौलिये और वार्म-अप से दिए सिग्नल? जानें IPL 2013 स्पॉट-फिक्सिंग की पूरी कहानी।

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HIGHLIGHTS

  • 2013 में राजस्थान रॉयल्स के 3 खिलाड़ी स्पॉट-फिक्सिंग में गिरफ्तार हुए थे।
  • खिलाड़ी बुकियों को इशारा देने के लिए तौलिये और टी-शर्ट खींचने जैसे सिग्नल इस्तेमाल करते थे।
  • CSK के टीम प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन भी सट्टेबाजी और जानकारी लीक करने में शामिल पाए गए।
  • इस कांड के बाद CSK और राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी पर 2 साल का बैन लगा दिया गया था।
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दिल्ली |

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने भारतीय क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल दिया। लेकिन साल 2013 में इसी लीग पर एक ऐसा दाग लगा, जिसने क्रिकेट की दुनिया को हिलाकर रख दिया। यह IPL का छठा सीजन था, जब स्पॉट-फिक्सिंग का जिन्न बोतल से बाहर आया और कई बड़े नाम इसकी चपेट में आ गए।

IPL 2013: जब क्रिकेट पर लगा फिक्सिंग का दाग

यह कहानी सिर्फ कुछ खिलाड़ियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने टीमों, मालिकों और पूरे क्रिकेट इकोसिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस कांड ने दिखाया कि कैसे चंद पैसों के लिए खेल की आत्मा को बेचा जा सकता है।

16 मई 2013: क्रिकेट जगत में मचा हड़कंप

16 मई 2013 की सुबह क्रिकेट फैंस के लिए एक चौंकाने वाली खबर लेकर आई। दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों को स्पॉट-फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है।

इन खिलाड़ियों में भारत के लिए वर्ल्ड कप जीत चुके तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत, अजित चंडीला और अंकित चवन शामिल थे। इस खबर ने क्रिकेट जगत में सनसनी फैला दी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ी ऐसा कर सकते हैं।

कैसे हुआ स्पॉट-फिक्सिंग का पर्दाफाश?

दिल्ली पुलिस ने बताया कि वे पिछले कुछ समय से बुकियों के एक नेटवर्क पर नजर रख रहे थे। फोन टैपिंग और सर्विलांस के जरिए उन्हें पता चला कि IPL मैचों में स्पॉट-फिक्सिंग की जा रही है, जिसमें खिलाड़ी भी शामिल हैं।

पुलिस ने इस ऑपरेशन में 11 बुकियों को भी गिरफ्तार किया। जांच में यह भी सामने आया कि राजस्थान रॉयल्स के एक पूर्व खिलाड़ी अमित सिंह बुकियों और खिलाड़ियों के बीच बिचौलिए का काम कर रहे थे।

खिलाड़ियों के वो 5 सिग्नल, जिनसे बिक गया मैच

जांच का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि खिलाड़ी बुकियों को कैसे सिग्नल देते थे। यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। पुलिस ने उन 5 प्रमुख सिग्नलों का खुलासा किया, जिनका इस्तेमाल फिक्सिंग को अंजाम देने के लिए किया जाता था।

यह एक पूरी तरह से तयशुदा योजना थी। खिलाड़ी को किस ओवर में कितने रन देने हैं, यह पहले से तय होता था। ओवर शुरू होने से ठीक पहले, खिलाड़ी एक खास सिग्नल देता था ताकि मैदान के बाहर बैठे बुकी उस ओवर पर सट्टा लगा सकें।

तौलिये का खेल: सबसे आम सिग्नल

श्रीसंत पर आरोप था कि उन्होंने मोहाली में पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच में फिक्सिंग की थी। उन्हें एक ओवर में 14 से ज्यादा रन देने थे। इसके लिए उन्हें लगभग 40 लाख रुपए मिले थे।

सिग्नल देने के लिए श्रीसंत ने अपनी ट्राउजर में एक छोटा तौलिया खोंस रखा था। फिक्स ओवर फेंकने से पहले उन्होंने तौलिये को कुछ देर के लिए बाहर निकाला और फिर वापस रख लिया। यह बुकियों के लिए इशारा था कि अब सट्टा लगाने का समय आ गया है।

वार्म-अप और स्ट्रेचिंग का बहाना

एक और आम सिग्नल था ओवर शुरू होने से ठीक पहले बेवजह वार्म-अप या स्ट्रेचिंग करना। गेंदबाज अपनी घड़ी को सेट करने का नाटक करता या फिर अपनी कलाई घुमाता। ये सब सामान्य लग सकता था, लेकिन असल में यह बुकियों के लिए एक कोड था।

कपड़ों से जुड़े अन्य इशारे

खिलाड़ी अपनी टी-शर्ट को ऊपर-नीचे करने या लॉकेट को घुमाने जैसे इशारों का भी इस्तेमाल करते थे। अजित चंडीला पर आरोप था कि उन्होंने अपनी टी-शर्ट को ऊपर उठाकर बुकियों को सिग्नल दिया था। ये सभी सिग्नल कैमरों में भी कैद हुए, जो बाद में पुलिस के लिए अहम सबूत बने।

अजित चंडीला की एक भूल और 60 लाख का मामला

इस कांड में एक मजेदार वाकया भी सामने आया। 5 मई 2013 को जयपुर में पुणे वॉरियर्स इंडिया के खिलाफ मैच में अजित चंडीला को एक ओवर में 14 या उससे ज्यादा रन देने के लिए 60 लाख रुपए की पेशकश की गई थी।

सिग्नल देना भूला, बुकियों ने मांगे पैसे वापस

सब कुछ तय था, लेकिन चंडीला ओवर शुरू होने से पहले तय सिग्नल देना भूल गए। इस वजह से बुकी उस ओवर पर दांव नहीं लगा पाए। मैच के बाद बुकियों ने चंडीला से अपने पैसे वापस मांगे, जिसको लेकर काफी कहासुनी भी हुई। यह बातचीत भी पुलिस ने रिकॉर्ड कर ली थी।

चेन्नई सुपर किंग्स तक पहुंची जांच की आंच

यह मामला सिर्फ राजस्थान रॉयल्स तक ही सीमित नहीं रहा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसकी आंच दो बार की चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) तक भी पहुंच गई।

गुरुनाथ मयप्पन की गिरफ्तारी

24 मई 2013 को मुंबई पुलिस ने CSK के टीम प्रिंसिपल और तत्कालीन BCCI अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को सट्टेबाजी, साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया।

मयप्पन पर आरोप था कि वह टीम की अंदरूनी जानकारी बुकियों को लीक करते थे और खुद भी मैचों पर सट्टा लगाते थे। CSK ने शुरुआत में मयप्पन से दूरी बनाने की कोशिश की और उन्हें सिर्फ एक 'मानद सदस्य' बताया, लेकिन जांच में वह टीम के एक महत्वपूर्ण अधिकारी साबित हुए।

बॉलीवुड कनेक्शन और विंदू दारा सिंह

इस मामले में बॉलीवुड का कनेक्शन भी सामने आया जब अभिनेता विंदू दारा सिंह को गिरफ्तार किया गया। विंदू पर मयप्पन और बुकियों के बीच संपर्क साधने का आरोप था। इस गिरफ्तारी ने ग्लैमर और क्रिकेट के अंधेरे गठजोड़ को उजागर कर दिया।

BCCI का एक्शन और टीमों पर लगा बैन

इस पूरे कांड ने BCCI की साख पर बट्टा लगा दिया था। दबाव में आकर BCCI को कड़े कदम उठाने पड़े। बोर्ड ने अपनी एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया।

खिलाड़ियों पर लगा आजीवन प्रतिबंध

सितंबर 2013 में, BCCI ने एस. श्रीसंत और अंकित चवन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। अजित चंडीला पर भी लंबा बैन लगा। अमित सिंह को 5 साल और सिद्धार्थ त्रिवेदी को गवाही देने के बावजूद जानकारी छिपाने के लिए 1 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया।

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें और 2 साल का सस्पेंशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और जस्टिस लोढ़ा कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपनी जांच में गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी का दोषी पाया।

जुलाई 2015 में, लोढ़ा कमेटी ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी को IPL से 2 साल (2016 और 2017) के लिए सस्पेंड कर दिया। कुंद्रा और मयप्पन पर क्रिकेट गतिविधियों में शामिल होने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया।

हालांकि बाद में श्रीसंत और अंकित चवन पर लगे आजीवन प्रतिबंध को कोर्ट ने हटा दिया, लेकिन उनका क्रिकेट करियर लगभग खत्म हो चुका था। यह कांड आज भी IPL के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है, जो यह याद दिलाता है कि कैसे लालच खेल की भावना को नष्ट कर सकता है।

*Edit with Google AI Studio

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