जयपुर | विद्याधर नगर स्थित सीकर रोड पर लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत से बना नया ड्रेनेज सिस्टम पहली ही मानसूनी बारिश में फेल हो गया है। इस विफलता ने भाजपा सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
38 करोड़ पानी में!: सीकर रोड: 38 करोड़ का ड्रेनेज सिस्टम पहली बारिश में फेल
कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह खेड़ी ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए, सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
HIGHLIGHTS
- सीकर रोड पर 38 करोड़ का ड्रेनेज सिस्टम पहली बारिश में ही फेल हो गया।
- कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह खेड़ी ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- खेड़ी ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- स्थानीय विधायक और उपमुख्यमंत्री की जवाबदेही भी तय करने की मांग की गई।
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निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव महेंद्र सिंह खेड़ी ने इस मुद्दे को उठाते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोली है। उन्होंने कहा कि सिस्टम पहली ही बारिश में पूरी तरह असफल साबित हुआ है।
सड़कों पर भारी जलभराव और यातायात बाधित होने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खेड़ी ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी इस परियोजना में अनियमितताओं को लेकर शिकायतें की गई थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर सरकार और अधिकारियों को पहले ही आगाह किया गया था, लेकिन इन शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
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View this post on Instagramसरकार और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही
महेंद्र सिंह खेड़ी ने कहा कि इस मामले में केवल अधिकारी और ठेकेदार ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की विधायक और प्रदेश की उपमुख्यमंत्री की भी जिम्मेदारी बनती है।
खेड़ी ने कहा, "करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि खर्च होने के बावजूद यदि परियोजना पहली ही बारिश में विफल हो जाए तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।"उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उनकी मांग है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा की जाए।
साथ ही, दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। खेड़ी ने स्पष्ट किया कि जनता के पैसे का दुरुपयोग किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
इस विफलता ने न केवल जनता के पैसे की बर्बादी को उजागर किया है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को भी दर्शाया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगे भी उठाने के संकेत दिए हैं।
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