thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राज्य

मेवाड़ राजपरिवार: वसीयत पर कानूनी जंग: मेवाड़ राजपरिवार विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट का वसीयत जांच का आदेश

बलजीत सिंह शेखावत

अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत पर विवाद गहराया, बेटी ने उठाए हस्ताक्षर पर सवाल।

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद सिंह मेवाड़ की मूल वसीयत के निरीक्षण की अनुमति दी।
  • बेटी पद्मजा परमार ने वसीयत पर पिता के हस्ताक्षरों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं।
  • फॉरेंसिक विशेषज्ञ 15 मई को वसीयत की जांच करेंगे, जिसकी फोटोग्राफी प्रतिबंधित है।
  • वसीयत में लक्ष्यराज सिंह को एकमात्र उत्तराधिकारी बनाया गया है, जिसे कोर्ट में चुनौती मिली।
mewar royal family will dispute delhi high court order

उदयपुर | उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में संपत्ति और वसीयत को लेकर चल रहा विवाद अब देश की राजधानी तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने अब दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की मूल वसीयत के निरीक्षण की अनुमति प्रदान कर दी है। यह आदेश उनकी पुत्री पद्मजा परमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है।

वसीयत की फॉरेंसिक जांच के निर्देश

अदालत ने दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की मूल वसीयत के निरीक्षण की अनुमति दे दी है। यह फैसला उनकी बेटी पद्मजा परमार द्वारा हस्ताक्षरों पर उठाए गए सवालों के बाद आया है।

पद्मजा परमार ने दावा किया है कि वसीयत पर किए गए उनके पिता के हस्ताक्षर संदिग्ध हैं। उन्होंने इस मामले में विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच की मांग की थी।

न्यायालय ने वकीलों को फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर मूल दस्तावेजों का बारीकी से निरीक्षण करने की अनुमति दी है। यह प्रक्रिया निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है।

निरीक्षण के लिए कड़े नियम और शर्तें

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान वसीयत की कोई भी तस्वीर नहीं ली जाएगी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए फोटोग्राफी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

निरीक्षण की तिथि 15 मई तय की गई है। इस दौरान दोनों पक्षों के कानूनी प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

विवाद की जड़ और उत्तराधिकार का मामला

यह पूरा मामला पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद शुरू हुआ। उनका निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था, जिसके बाद वसीयत सार्वजनिक हुई।

उनकी अंतिम वसीयत को 7 फरवरी को उपपंजीयक कार्यालय में पंजीकृत कराया गया था। इस वसीयत के सामने आने के बाद से ही परिवार में मतभेद उभरने लगे थे।

वसीयत के अनुसार, अरविंद सिंह ने अपनी सभी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी अपने पुत्र लक्ष्यराज सिंह को नामित किया था। इस निर्णय ने बेटियों को असंतुष्ट कर दिया।

अदालत ने वकीलों को फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर मूल वसीयत का निरीक्षण करने की अनुमति दी है।

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट तक का सफर

वसीयत के सार्वजनिक होने के मात्र 15 दिनों के भीतर ही कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। बेटी पद्मजा परमार और भार्गवी ने इस वसीयत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर और मुंबई हाईकोर्ट में लंबित सभी केस दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिए। अब दिल्ली में ही इसकी सुनवाई हो रही है।

पद्मजा परमार ने पिता की विशाल संपत्ति के प्रबंधन के लिए 'लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' की भी मांग की है। वह संपत्ति के न्यायसंगत बंटवारे और प्रशासन की पक्षधर हैं।

अगली सुनवाई और भविष्य की दिशा

इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित की गई है। 15 मई को होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट इस सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मेवाड़ राजपरिवार का यह विवाद न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। संपत्तियों का मूल्य करोड़ों में होने के कारण यह मामला और भी पेचीदा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद वसीयत की वैधता पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।

यह विवाद दर्शाता है कि राजघरानों में उत्तराधिकार की लड़ाई कितनी जटिल हो सकती है। आने वाले समय में न्यायालय का निर्णय मेवाड़ राजपरिवार के भविष्य की दिशा तय करेगा।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: