चित्तौड़गढ़ | राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में 'काला सोना' कही जाने वाली अफीम की सरकारी तौल प्रक्रिया का रविवार से विधिवत शुभारंभ हो गया है। नारकोटिक्स विभाग के प्रथम खंड द्वारा आयोजित इस प्रक्रिया के पहले ही दिन 18 विभिन्न गांवों के लगभग 303 किसानों की अफीम की फसल का वजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर चित्तौड़गढ़ के सांसद और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने तौल केंद्र का दौरा किया। उन्होंने वहां उपस्थित किसानों से विस्तृत चर्चा की और उनकी समस्याओं तथा सुझावों को गंभीरता से सुना।
अफीम तौल: मोबाइल पर मिलेंगे लाइसेंस: चित्तौड़गढ़ में अफीम तौल शुरू: सांसद सीपी जोशी बोले- अब सीधे मोबाइल पर मिलेंगे लाइसेंस, 1.08 लाख हुए पट्टे
चित्तौड़गढ़ में अफीम तौल प्रक्रिया शुरू हो गई है। सांसद सीपी जोशी ने किसानों को डिजिटल लाइसेंस और पारदर्शी व्यवस्था का भरोसा देते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है।
HIGHLIGHTS
- चित्तौड़गढ़ में पहले दिन 18 गांवों के 303 किसानों की अफीम का तौल किया गया।
- सांसद सीपी जोशी ने घोषणा की कि भविष्य में अफीम लाइसेंस सीधे मोबाइल पर उपलब्ध होंगे।
- भाजपा शासन में अफीम लाइसेंस की संख्या 18 हजार से बढ़कर 1.08 लाख तक पहुंच गई है।
- प्रथम चरण का तौल 12 अप्रैल तक चलेगा, जिसके बाद 15 अप्रैल से सीपीएस पद्धति का तौल होगा।
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अफीम लाइसेंस का होगा डिजिटल कायाकल्प
मीडिया कर्मियों से संवाद के दौरान सांसद सीपी जोशी ने एक दूरदर्शी योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार अफीम की खेती को तकनीक से जोड़कर किसानों की राह आसान कर रही है।
सांसद ने घोषणा की कि आने वाले समय में अफीम के लाइसेंस प्राप्त करने के लिए किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार इन लाइसेंसों को सीधे किसानों के मोबाइल फोन पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इस डिजिटल बदलाव से किसान अब अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार घर बैठे ही अपने उत्तराधिकारी या नॉमिनी का चुनाव कर सकते हैं।
लाइसेंस संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि
वर्ष 2014 के आंकड़ों की तुलना करते हुए सांसद ने बताया कि पहले अफीम की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। उस समय लाइसेंसों की संख्या काफी सीमित थी, जिससे किसान परेशान थे।
भाजपा सरकार के कार्यकाल में अफीम लाइसेंसों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। सांसद के अनुसार, लाइसेंस की संख्या 18 हजार से बढ़कर अब लगभग 1 लाख 8 हजार तक पहुंच चुकी है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब छोटे किसानों के लिए भी अफीम की खेती अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। अफीम के साथ-साथ पोस्त दाना और अन्य सह-उत्पादों की बिक्री से किसानों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
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पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर कड़ी नजर
तौल केंद्रों पर की गई व्यवस्थाओं पर संतोष जताते हुए सीपी जोशी ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कोई अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत मिले, तो किसान चुप न रहें।
सांसद ने किसानों के साथ अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर साझा किया है ताकि वे सीधे उनसे संपर्क कर सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नीमच अफीम फैक्ट्री में पूर्व में आई शिकायतों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है। कई मामलों में एफआईआर दर्ज कर पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की गई है।
तौल कार्यक्रम और आगामी योजनाएं
प्रथम खंड के अफीम अधिकारी बीएल मीणा ने तौल प्रक्रिया की समय सीमा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान तौल प्रक्रिया 12 अप्रैल तक निरंतर जारी रहेगी, जिसमें सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
12 अप्रैल को प्रथम चरण के समापन के पश्चात, 15 अप्रैल से सीपीएस (कंसंट्रेटेड पॉपी स्ट्रॉ) पद्धति वाले किसानों की अफीम का तौल प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने मुख्यालय के निर्देशों पर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
विभाग ने तौल केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया, पानी और बैठने के उचित प्रबंध सुनिश्चित किए हैं। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई कठिनाई न हो।
अफीम नीति और भविष्य की राह
सांसद जोशी ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी नई अफीम नीति किसानों के लिए और भी अधिक हितकारी होगी। सरकार का लक्ष्य अफीम की खेती को अधिक सुरक्षित और लाभप्रद बनाना है।
पहले के समय में यदि किसी गांव में एक भी पट्टा कम होता था, तो पूरे गांव को खेती से वंचित कर दिया जाता था। परंतु अब नियमों में बदलाव कर एक पट्टा होने पर भी किसान को खेती का अधिकार दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि 'काला सोना' उगाने वाले किसानों की मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से इस पूरी व्यवस्था को आधुनिक और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा रहा है।
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