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मनोरंजन

दिलीप कुमार से ए.आर. रहमान बनने की कहानी और धर्म बदलने की असली वजह

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ए.आर. रहमान के 59वें जन्मदिन पर जानिए उनके दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान बनने का सफर और इसके पीछे का दर्द।

HIGHLIGHTS

  1. 1 ए.आर. रहमान का असली नाम दिलीप कुमार था और उन्होंने साल 1987 में इस्लाम अपनाया था। पिता के कैंसर के इलाज के दौरान सूफी संत के संपर्क में आने से उनका झुकाव सूफीवाद की ओर बढ़ा। रहमान का नया नाम एक हिंदू ज्योतिषी ने सुझाया था जिसे उन्होंने तुरंत पसंद कर लिया। संगीतकार ने स्पष्ट किया है कि उन पर धर्म बदलने के लिए कभी कोई बाहरी दबाव नहीं था।
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A R Rahman

मुंबई | संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह ए.आर. रहमान आज अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं। हाल ही में वह अपने निजी जीवन और तलाक की खबरों के कारण काफी चर्चा में रहे हैं। ए.आर. रहमान को मोजार्ट ऑफ मद्रास के नाम से जाना जाता है और उनकी पहचान वैश्विक स्तर पर है। उनके जीवन का एक ऐसा पहलू है जो अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है।

दिलीप कुमार से ए.आर. रहमान बनने का सफर

ए.आर. रहमान का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और उनका नाम दिलीप कुमार रखा गया था। उनके जीवन में एक ऐसा कठिन समय आया जिसने उनकी पूरी पहचान को बदल दिया।

रहमान के पिता आर.के. शेखर एक प्रसिद्ध संगीतकार थे और उनके निधन के समय रहमान की उम्र बहुत कम थी। पिता की लंबी बीमारी ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया था।

सूफीवाद का गहरा प्रभाव

रहमान के पिता कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे और उनके अंतिम दिनों में एक सूफी संत ने उनकी सेवा की थी। इस दौरान रहमान के परिवार ने सूफीवाद की शांति को बहुत करीब से देखा।

रहमान बताते हैं कि उनकी मां हमेशा से सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करने वाली महिला रही हैं। उनके घर की दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं के साथ ही मक्का-मदीना की तस्वीरें भी लगी रहती थीं।

दिल से लिया गया व्यक्तिगत फैसला

अक्सर लोग रहमान के धर्म परिवर्तन को लेकर कई तरह के कयास लगाते हैं लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह व्यक्तिगत बताया है। उन्होंने अपनी बायोग्राफी में स्पष्ट किया कि सूफियत के रास्ते पर किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता।

साल 1987 में जब उनका पूरा परिवार एक नए घर में शिफ्ट हुआ तब उन्होंने आधिकारिक तौर पर सूफी इस्लाम को अपनाया। उन्हें इस बदलाव के बाद बहुत अधिक सामाजिक और आध्यात्मिक आजादी का अनुभव हुआ।

एक ज्योतिषी ने चुना था नया नाम

एक बेहद दिलचस्प तथ्य यह है कि रहमान का नया मुस्लिम नाम एक हिंदू ज्योतिषी द्वारा सुझाया गया था। रहमान की मां अपनी छोटी बहन की कुंडली दिखाने के लिए एक ज्योतिषी के पास गई थीं।

उसी समय रहमान भी अपने लिए एक नई पहचान और एक सार्थक नाम की तलाश कर रहे थे। उस ज्योतिषी ने उन्हें अब्दुल रहमान और अब्दुल रहीम के रूप में दो सुंदर नाम सुझाए थे।

नाम के पीछे का गहरा अर्थ

रहमान को रहमान नाम तुरंत पसंद आ गया क्योंकि इसमें एक विशेष शांति महसूस होती थी। उन्होंने इसके आगे अल्लाह रक्खा जोड़ दिया और इस तरह दिलीप कुमार हमेशा के लिए ए.आर. रहमान बन गए।

आज वह दुनिया के सबसे सफल संगीतकारों में से एक हैं और उनकी पहचान उनके संगीत से होती है। उनका जीवन सादगी और आध्यात्मिकता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

संगीत और आध्यात्मिकता का संगम

रहमान का मानना है कि धर्म परिवर्तन के बाद उनके संगीत सृजन में एक नई गहराई और रूहानियत आई है। वह अपनी हर धुन और रचना को ईश्वर की एक विशेष प्रार्थना की तरह देखते हैं।

उनके संगीत में अक्सर सूफी प्रभाव स्पष्ट रूप से सुनाई देता है जो दुनिया भर के श्रोताओं को सुकून देता है। ख्वाजा मेरे ख्वाजा और कुन फया कुन जैसे कालजयी गीत इसी रूहानी सफर की देन हैं।

आज उनके जन्मदिन के विशेष अवसर पर दुनिया भर से उनके प्रशंसक उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं भेज रहे हैं। रहमान का जीवन हमें सिखाता है कि शांति और आत्मिक संतोष किसी भी नेक रास्ते से प्राप्त किया जा सकता है।

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