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राजनीति

गहलोत बोले- जिस देश को हमने बनाया वही आज खिलाफ, बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता को बताया कूटनीतिक विफलता

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 36

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा पर गहरी चिंता जताई है और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गहलोत ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व की याद दिलाते हुए केंद्र की कूटनीतिक विफलता पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने राइजिंग राजस्थान और डिजिफेस्ट जैसे आयोजनों को जनता के पैसे की बर्बादी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार में प्रशासनिक अराजकता और जवाबदेही की कमी है।
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Ashok Gehlot

जयपुर | राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा और बर्बरता पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तुरंत कड़ा हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है।

गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि बांग्लादेश से आ रही हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ बर्बरता की खबरें विचलित करने वाली हैं। उन्होंने बताया कि महज उन्नीस दिनों में पांच हिंदुओं की हत्या और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार मानवता पर गहरा कलंक हैं।

कूटनीतिक विफलता का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में वर्ष उन्नीस सौ इकहत्तर के उस ऐतिहासिक दौर की यादें ताजा कीं जब इंदिरा गांधी भारत का नेतृत्व कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उस समय भारत ने न केवल कूटनीतिक कड़ापन दिखाया था बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इतिहास और भूगोल दोनों बदल दिए थे।

गहलोत ने उल्लेख किया कि इंदिरा गांधी ने अमेरिका जैसी महाशक्ति की भी परवाह नहीं की थी जिसने भारत के खिलाफ सातवां बेड़ा भेज दिया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस देश का निर्माण भारत ने किया था आज वही देश भारत के खिलाफ खड़ा हो गया है।

गहलोत के अनुसार यह भारत की विदेश नीति की एक बड़ी हार है कि हमारा पड़ोसी देश ही हमारे हितों के खिलाफ जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत विदेश नीति के बिना क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखना असंभव है।

केंद्र सरकार से ठोस कदम की मांग

गहलोत ने कहा कि बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता को दर्शाती है। केंद्र सरकार को सिर्फ गहरी चिंता जताने वाले रस्मी बयानों से आगे बढ़कर अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के जीवन और उनके मान-सम्मान की रक्षा करना हमारी नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।

गहलोत ने केंद्र को चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षेत्रीय शक्ति का सही उपयोग करना चाहिए।

राज्य सरकार के आयोजनों पर निशाना

गहलोत ने बांग्लादेश के मुद्दे के साथ-साथ राजस्थान की वर्तमान भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने डिजिफेस्ट समिट और राइजिंग राजस्थान जैसे आयोजनों को पूरी तरह से विफल करार दिया है।

उन्होंने लिखा कि राजस्थान में आज प्रशासनिक और सरकारी अराजकता का माहौल है और जनता के पैसे की ऐसी बर्बादी पहले कभी नहीं देखी गई। गहलोत के अनुसार राइजिंग राजस्थान और प्रवासी राजस्थानी दिवस का नाटक पूरी तरह फेल हो चुका है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य केवल भाजपा की छवि सुधारना था लेकिन वास्तविकता में राज्य को कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

जनता के पैसे की बर्बादी का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इन आयोजनों में निवेशक पूरी तरह नदारद दिखे और खेलो इंडिया गेम्स में भी खिलाड़ियों की भारी दुर्दशा हुई। उन्होंने कहा कि डिजिफेस्ट में भी अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा और जनता को इनसे कुछ हासिल नहीं हुआ।

गहलोत ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार सिर्फ अपने प्रचार और वाहवाही के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए बहा रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक प्रदेश की जनता के पैसे को इस तरह उड़ाया जाता रहेगा और इसकी जवाबदेही कब तय होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के खजाने का उपयोग विकास कार्यों के बजाय फिजूलखर्ची में किया जा रहा है। जनता इस अन्याय को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।

प्रशासनिक अराजकता पर प्रहार

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में कोई जवाबदेही नहीं बची है और प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनने वाला नहीं है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जनता को कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहे हैं।

गहलोत ने अंत में कहा कि सरकार को विज्ञापनों की राजनीति छोड़कर धरातल पर काम करना चाहिए। जनता अपनी मेहनत की कमाई का हिसाब मांग रही है और सरकार को इसका जवाब देना ही होगा।

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