यह ऐसा था जैसे किसी फिल्म का प्रीमियर हो और पोस्टर पर हीरो-हीरोइन की तस्वीर हो, लेकिन वे खुद वहां मौजूद ही न हों। संगठन की मुखिया का ऐसे गंभीर मुद्दे पर नदारद रहना कई सवाल खड़े करता है।
महामंत्री की 'विधायक' वाली गलती और मौन समर्थन
बचाव के लिए भाजपा के 2 महामंत्री और 2 प्रवक्ता पत्रकारों से रूबरू हुए। इनमें से महामंत्री गणपत सिंह राठौड़ तो बोलने के जोश में यह भी भूल गए कि संयम लोढ़ा अब विधायक नहीं, बल्कि पूर्व विधायक हैं।
उन्होंने अपने 6 मिनट के वक्तव्य में पूरे 6 बार संयम लोढ़ा को 'विधायक' बोल दिया। शायद उन्हें लगा कि बार-बार विधायक कहने से लोढ़ा फिर से विधायक बन जाएंगे या फिर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं।
इससे भी मजेदार बात यह रही कि पास में बैठे दूसरे नेताओं ने भी इस गलती के लिए उनको एक बार भी नहीं टोका। ऐसा लगा जैसे सबने मिलकर तय कर लिया हो कि 'चलो, आज गणपत जी को ही बोलने देते हैं, क्या पता कौन सा भूत सवार हो गया है'।
यह गलती सिर्फ एक जुबान फिसलना नहीं थी, बल्कि यह दिखाती है कि भाजपा नेताओं के मन में अभी भी पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का कितना गहरा प्रभाव है, या शायद वे अभी तक सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
सनातन धर्म पर वार-पलटवार और चुप्पी का रहस्य
कांग्रेस ने रामझरोखा मंदिर की जमीन पर पट्टे काटने के मुद्दे को सनातन धर्म विरोधी बताया था। उन्होंने भाजपा को सनातन धर्म के नाम पर सत्ता में आने वाली पार्टी को ही सनातन धर्म विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
इस गंभीर आरोप के बावजूद, जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी, राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और सांसद लुंबाराम चौधरी की चुप्पी राजनीतिक गलियारे और आमजन में चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी चुप्पी कई अटकलों को हवा दे रही है।
प्रेसवार्ता में शामिल महामंत्री गणपत सिंह राठौड़, नरपत सिंह राणावत, प्रवक्ता गोपाल माली और राजू सोलंकी ने कांग्रेस के प्रदर्शन को पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का राजनीतिक स्टंट बताया। उन्होंने लोढ़ा का सनातन धर्म विरोधी बताते हुए काटे गए पट्टों को रामझरोखा मंदिर की जमीन नहीं होने का हवाला दिया।
भाजपा नेताओं ने इसे राज्यमंत्री ओटाराम देवासी की छवि को धूमिल करने की सस्ती लोकप्रियता बताया। लेकिन सवाल यह है कि अगर सब कुछ इतना ही 'सस्ता' और 'स्टंट' था, तो भाजपा को जवाब देने में दो दिन क्यों लग गए, और उनके प्रमुख नेता क्यों गायब रहे?
राजनीतिक गलियारों में गरमाई चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम ने सिरोही की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। भाजपा की यह 'देर से जागी' प्रेसवार्ता और उसमें हुई 'विधायक' वाली गलती ने कांग्रेस को एक नया मुद्दा दे दिया है।
राज्यमंत्री और उनके बेटे पर लगे आरोपों का बचाव करते हुए, भाजपा ने शायद खुद को ही एक और मुश्किल में डाल दिया है। अब देखना यह है कि यह राजनीतिक ड्रामा और कितने नए ट्विस्ट लेकर आता है।