जयपुर | लोकसभा चुनावों के दौरान पूर्व सीएम(CM) अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत की सीट (जालोर-सिराही) पर प्रचार करने नहीं जाने के मुद्दे पर अब कशमकश शुरू हो गई है। सचिन पायलट ने कहा था कि उन्हें जालोर चुनाव प्रचार के लिए बुलाया नहीं। अशोक गहलोत ने पायलट के बयान को बेवकूफी से जोड़ते हुए हमला बोला है।
यह अच्छी बात नहीं। इससे जनता(Public) में गलत मैसेज जाता है कि गहलोत क्यों नहीं आए या क्यों नहीं बुलाए गए। अनावश्यक बयान से उम्मीदवार को नुकसान होता है।चुनाव में कभी इस तरह नहीं बोलना चाहिए। चुनाव में प्रचार के लिए कोई बुलाता है, कोई नहीं बुलाता है। सब अपने समीकरण देखते हैं। हर उम्मीदवार अपने हिसाब से प्रचार के लिए नेताओं को बुलाता है। कांग्रेस के कंट्रोल रूम में रिक्वेस्ट(Request) करता है। यह मुद्दा नहीं होना चाहिए।
संबंधित खबरें
मेरे जाने से किसी के जातिगत समीकरण बिगड़ जाएं, नुकसान हो जाए तो क्या फायदा
गहलोत ने कहा-मैं चुनावों के दौरान इस तरह के बयानों से बचता हूँ। मैंने कोई बयान नहीं दिए कि मुझे क्यों नहीं बुलाया | मान लीजिए मैं किसी को सूट नहीं करता तो नहीं बुलाएगा। मैं जाऊंगा तो कास्ट इक्वेशन(cast equation) बिगड़ जाएंगे। तो वो उम्मीदवार नहीं बुलाएगा। हमारे यहां जातिगत राजनीति भी चलती है। जहां मैं जाऊं और नुकसान हो तो वहां जाने का क्या फायदा | जिस उम्मीदवार(Candidate) को लगे कि उनके आने से मेरी कास्ट इक्वेशन(cast equation) बिगड़ सकती है तो वह नहीं बुलाएगा। मैं उस बात को माइंड क्यों करूं, मैं तो चाहूँगा कि वह जीते।
संबंधित खबरें
कांग्रेस के हाथ का चुनाव चिन्ह देखता हूँ
गहलोत ने कहा- चाहे कोई आदमी किसी का आदमी हो, मैं नहीं देखता हूँ। मैं कांग्रेस के हाथ का चुनाव चिन्ह देखता हूँ। चाहे किसी का आदमी हो वह जीतना चाहिए, इसलिए मैं बयान देने से बचता हूँ।
पूरे राजस्थान में चुनाव प्रचार करता हूँ
पूरे राजस्थान में चुनाव प्रचार करता हूँ
संबंधित खबरें
गहलोत ने कहा- मैं राजस्थान की 25 सीट में से 22 सीटों पर प्रचार के लिए गया हूँ। हमेशा प्रचार में जुटा रहा हूँ। चुनाव लड़ने वाले नेता को अपने क्षेत्र में रहना पड़ता है। उसमें कोई बुराई नहीं है। पहले खुद तो जीतें। मैं एक मात्र नेता हूँ, जो अपने क्षेत्र में एक दिन जाता हूँ, अंतिम दिन जाता हूँ। लोकसभा हो या विधानसभा बाकी वक्त पूरे राजस्थान में कैंपेन(campaign) करता हूँ। दिसंबर में भी ऐसा ही किया था। अभी लोकसभा चुनाव में भी अधिकांश बाहर ही रहा हूँ।
कभी नहीं मिला रविंद्र भाटी से
संबंधित खबरें
बाड़मेर सीट पर रविंद्र सिंह भाटी की मदद करने के आरोपों पर कहा- मैं तो बाड़मेर सीट पर प्रचार करने के लिए तीन बार गया हूँ। बाड़मेर ऐसी सीट है, जहां तीन बार कैंपेन(campaign) किया है। जैसलमेर, बाड़मेर और सिवाना में सभा की है। वहां के कांग्रेस उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल मुझे बार-बार प्रचार के लिए बुला रहे हैं। उस सीट के लिए ऐसे आरोप समझ से परे हैं। जो तीसरे उम्मीदवार खड़े हुए हैं, उनसे जिंदगी में कभी नहीं मिला, ना मैं जानता हूँ।
गहलोत ने कहा- मैं जिस व्यक्ति को जानता ही नहीं हूँ। तीन बार मुझे कांग्रेस का उम्मीदवार बुला रहा है। ऐसी बेवकूफी करने वालों की कमी थोड़ी है, जिन्हें आरोप लगाना भी नहीं आता। आरोप लगाने से पहले सच्चाई तो समझ लेनी चाहिए। हमें तो नंबर वन सीट बाड़मेर लग रही है। राजस्थान में नंबर वन सीट मुझे उम्मेदाराम की सीट लगती है।
जालोर टफ(tuff) सीट है
गहलोत ने कहा- मैं जिस व्यक्ति को जानता ही नहीं हूँ। तीन बार मुझे कांग्रेस का उम्मीदवार बुला रहा है। ऐसी बेवकूफी करने वालों की कमी थोड़ी है, जिन्हें आरोप लगाना भी नहीं आता। आरोप लगाने से पहले सच्चाई तो समझ लेनी चाहिए। हमें तो नंबर वन सीट बाड़मेर लग रही है। राजस्थान में नंबर वन सीट मुझे उम्मेदाराम की सीट लगती है।
जालोर टफ(tuff) सीट है
वैभव गहलोत के चुनाव पर कहा- जालोर सीट पर 20 साल से बीजेपी जीत रही है। गुजरात से टच होती टफ सीट है। वैभव गहलोत ने चुनाव अच्छा लड़ा है। जिस तरह इलेक्शन मैनेज(election manage) हुआ। इससे अच्छा हो नहीं सकता। मैं भी प्रचार करने गया। अभी पार्टी संकट में है। सत्ता में नहीं है तो ऐसे वक्त में हमारा धर्म बनता है कि आगे आना चाहिए। इसलिए उसने चुनाव लड़ना तय किया। जोधपुर से लड़ना नहीं था। पहले से तय किया हुआ था कि जालोर से लड़ना है।
2019 में मैं जानता था जोधपुर से वैभव नहीं जीतेगा
2019 में मैं जानता था जोधपुर से वैभव नहीं जीतेगा
संबंधित खबरें
गहलोत ने कहा- 2019 में भी वैभव गहलोत को यहीं (जालोर) से लड़ना था। मैं उनको जोधपुर ले गया, क्योंकि जोधपुर में स्थिति ऐसी बन गई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में हम जोधपुर की सीट करीब 4 लाख से हारे थे। 2019 में मैं मुख्यमंत्री(CM) था। हमें मालूम था कि मोदी का माहौल बना हुआ है। सीटें आनी मुश्किल हैं। मेरा और कार्यकर्ताओं का कैलकुलेशन(Calculation) यह था कि यहां कोई उम्मीदवार आएगा तो चुनाव बन ही नहीं पाएगा। इससे बाकी सीटों पर असर पड़ेगा कि मुख्यमंत्री(CM) का खुद का जिला है, वहां भी ऐसी स्थिति हो रही है।
कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि वैभव गहलोत लड़ते हैं तो कम से कम टक्कर में आ जाएंगे। इसलिए मैंने वहां अलाऊ(Allow) किया। यह बात अहमद पटेल जानते थे। वो आज दुनिया में नहीं हैं। यह जानते हुए कि जीतने की कोई संभावना नहीं है, फिर भी हमने वैभव को खड़ा किया। इस बार भी जालोर-सिरोही के कार्यकर्ताओं की डिमांड(Demand) थी। वैभव के लिए कार्यकर्ता जयपुर तक आ गए थे। इसलिए वैभव को इस बार जालोर से लड़वाया।
कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि वैभव गहलोत लड़ते हैं तो कम से कम टक्कर में आ जाएंगे। इसलिए मैंने वहां अलाऊ(Allow) किया। यह बात अहमद पटेल जानते थे। वो आज दुनिया में नहीं हैं। यह जानते हुए कि जीतने की कोई संभावना नहीं है, फिर भी हमने वैभव को खड़ा किया। इस बार भी जालोर-सिरोही के कार्यकर्ताओं की डिमांड(Demand) थी। वैभव के लिए कार्यकर्ता जयपुर तक आ गए थे। इसलिए वैभव को इस बार जालोर से लड़वाया।
टैग:
jaipur
rajasthan
Jalore
Sirohi
LokSabha
Election
AshokGehlot
SachinPilot
VaibhavGehlot
RavindraSinghBhati