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राजनीति

मनरेगा निरस्त करने के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी अभियान, सी़डब्ल्यूसी बैठक में खड़गे का बड़ा ऐलान

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनरेगा को निरस्त करने और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ साजिश बताया है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनरेगा को निरस्त करने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया। मतदाता सूची पुनरीक्षण को लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की साजिश बताया। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई। विकसित भारत रोजगार मिशन को महात्मा गांधी का अपमान करार दिया।
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नई दिल्ली | कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा को निरस्त किए जाने के खिलाफ एक व्यापक और देशव्यापी अभियान की आवश्यकता पर बल दिया है। दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान खड़गे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को खत्म करना गरीबों के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। खड़गे का मानना है कि यह योजना केवल रोजगार का साधन नहीं थी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया। खड़गे ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निर्देश दिया कि वे जमीन पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से न हटाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची में हेराफेरी की गई तो यह लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा।

लोकतंत्र और संविधान पर मंडराता खतरा

खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश का लोकतंत्र और संविधान दोनों ही खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों के अधिकारों को कुचला जा रहा है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने मनरेगा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि यूपीए सरकार की इस दूरदर्शी योजना की सराहना पूरी दुनिया में हुई थी। इस योजना ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की थी, लेकिन वर्तमान सरकार इसे बिना किसी ठोस मूल्यांकन के बंद कर रही है।

उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना राज्यों और राजनीतिक दलों से परामर्श किए इतने बड़े कानून को निरस्त करना तानाशाही का प्रमाण है। खड़गे ने तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि कैसे किसानों के एकजुट विरोध ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस भी मनरेगा के मुद्दे पर वैसा ही राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। पार्टी का मानना है कि इस योजना का नाम बदलना और इसके स्वरूप को बिगाड़ना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है।

सांप्रदायिक सौहार्द और वैश्विक छवि

बैठक के दौरान खड़गे ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूरा भारत इन घटनाओं को लेकर चिंतित है और सरकार को इस दिशा में कूटनीतिक कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। खड़गे ने कहा कि क्रिसमस समारोहों और धार्मिक आयोजनों पर होने वाले हमले भारत की वैश्विक छवि को धूमिल कर रहे हैं।

कांग्रेस कार्यसमिति की इस बैठक में संगठन की आंतरिक मजबूती पर भी चर्चा हुई। बैठक में शशि थरूर की उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा, क्योंकि वे पिछली कुछ महत्वपूर्ण बैठकों से नदारद थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी इस रणनीति सत्र का हिस्सा बने। बैठक की शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दिवंगत नेताओं शिवराज पाटिल व श्रीप्रकाश जायसवाल को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। राहुल गांधी ने भी इस अवसर पर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच जाने का आह्वान किया।

नए कानून का विरोध और भविष्य की रणनीति

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन विधेयक को लेकर कांग्रेस ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। खड़गे ने कहा कि नया कानून राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने वाला है। पुराने कानून में केंद्र की हिस्सेदारी अधिक थी, लेकिन अब 60:40 का अनुपात राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। कांग्रेस का तर्क है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे और केंद्र अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।

बैठक के समापन पर यह स्पष्ट किया गया कि कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनावों और संसद सत्र के दौरान इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाएगी। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिलहाल विराम देते हुए पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए एकजुट होकर लड़ने का फैसला किया है। खड़गे ने अंत में कहा कि कांग्रेस गरीबों और वंचितों की आवाज बनी रहेगी और सरकार की जनविरोधी नीतियों का डटकर मुकाबला करेगी। आने वाले दिनों में पार्टी के विभिन्न विंग इस आंदोलन को ब्लॉक स्तर तक ले जाने की योजना बना रहे हैं।

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