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राजनीति

मनरेगा बिल पर अमराराम: 'सरकार गोडसे की तपस्या कर रही, गरीबों का रोजगार छीना'

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 47

लोकसभा में मनरेगा बिल (MNREGA Bill) पर बहस के दौरान सीकर सांसद अमराराम (Sikar MP Amraram) ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरों का हक छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) नहीं, गोडसे (Godse) की तपस्या कर रही है और बिल वापस लेने की मांग की।

HIGHLIGHTS

  1. 1 अमराराम ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरों का हक छीनने का आरोप लगाया। सांसद ने कहा, सरकार महात्मा गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है। मनरेगा के बजट में कटौती और केंद्र-राज्य हिस्सेदारी पर जताई चिंता। नरेगा संशोधन विधेयक-2025 को वापस लेने की मांग की।
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गोडसे की तपस्या कर रही सरकार: अमराराम

सीकर: लोकसभा में मनरेगा बिल (MNREGA Bill) पर बहस के दौरान सीकर सांसद अमराराम (Sikar MP Amraram) ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरों का हक छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) नहीं, गोडसे (Godse) की तपस्या कर रही है और बिल वापस लेने की मांग की।

सीपीआई(एम) पार्टी के सांसद अमराराम ने नरेगा संशोधन विधेयक-2025 पर अपनी बात रखी। उन्होंने इस बिल को 'जी-राम-जी का बिल' बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

केंद्र पर गंभीर आरोप: 'गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या'

सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार महात्मा गांधी की नहीं, बल्कि गोडसे की तपस्या कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के गरीब मजदूरों का रोजगार छीनने का काम किया है। खेती में बुवाई से कटाई तक मशीनीकरण बढ़ गया है, जिससे मजदूरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मनरेगा के मूल प्रावधानों से छेड़छाड़

अमराराम ने भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर बताया। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए-1 के समय ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने के लिए नरेगा कानून बना था।

इस कानून में न्यूनतम 100 दिन की मजदूरी देने का प्रावधान था। भाजपा सरकार अब नरेगा के मूल प्रावधानों से दूर भागने का काम कर रही है।

पहले मनरेगा मजदूरों को पूरी मजदूरी केंद्र सरकार देती थी। अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 के अनुपात में बांटने की तैयारी की जा रही है, जो मजदूरों के हक पर कुठाराघात है।

काम देने के दावे और हकीकत

सांसद ने लोकसभा में बताया कि 2024-25 के बजट में कुल नरेगा मजदूरों में से सिर्फ 5% को ही 100 दिन का काम मिला है। यह सरकार के दावों की पोल खोलता है।

उन्होंने कहा कि 125 दिन काम देने का ढकोसला किया जा रहा है, जबकि मजदूरों को पर्याप्त काम भी नहीं मिल रहा है। केरल सरकार ने मजदूरों के लिए कल्याण बोर्ड बनाया है।

अमराराम ने सवाल उठाया कि भाजपा और उसकी समर्थित सरकारें अन्य राज्यों में ऐसे कल्याण बोर्ड क्यों नहीं बनाती हैं। यह गरीबों के प्रति उनकी उपेक्षा को दर्शाता है।

बजट कटौती और गरीबों के साथ विश्वासघात

सांसद अमराराम ने भाजपा पर गरीबों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले नरेगा के लिए 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का बजट था।

महंगाई बढ़ने के बावजूद मनरेगा का बजट घटाकर 68 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह गरीबों के हक पर सीधा हमला है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि नरेगा को समृद्ध करने और मजदूरी बढ़ाने की जरूरत थी। इसके बजाय, जो कुछ मजदूरों को मिल रहा था, उसे भी छीनने का काम हो रहा है।

नरेगा संशोधन विधेयक-2025 वापस लेने की मांग

लोकसभा में सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार गांव के गरीब मजदूरों का हक छीन रही है। उन्होंने मांग की कि नरेगा संशोधन विधेयक-2025 को तुरंत वापस लिया जाए।

यदि इसे वापस नहीं लिया जाता है, तो इसे सलेक्टिव कमेटी को भेजा जाना चाहिए। यह विधेयक ग्रामीण मजदूरों के भविष्य पर सीधा असर डालेगा।

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