thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 🌺 ज़िंदगानी 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 💡 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

भाजपा को RSS कंट्रोल नहीं करता: मोहन भागवत का बड़ा बयान

thinQ360 thinQ360 51

भोपाल में आयोजित एक गोष्ठी में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस भाजपा को नियंत्रित नहीं करता है और समाज निर्माण ही संघ का मुख्य लक्ष्य है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 आरएसएस भाजपा या विश्व हिंदू परिषद को नियंत्रित नहीं करता है। संघ का लक्ष्य सत्ता या चुनाव नहीं बल्कि समाज का चरित्र निर्माण है। हिंदू पहचान सभी भारतीयों को जोड़ने वाला मुख्य सूत्र है। स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने और आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है।
mohan bhagwat statement on rss bjp relationship bhopal

भोपाल | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक प्रमुख जन गोष्ठी के दौरान कई महत्वपूर्ण और सामयिक विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस बात का खंडन किया कि भारतीय जनता पार्टी को संघ द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ को भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से देखना एक बहुत बड़ी भूल है क्योंकि ये सभी संगठन पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करते हैं और संघ किसी को भी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता है। संघ का प्राथमिक उद्देश्य समाज की सेवा करना है न कि राजनीति की दिशा तय करना।

संघ का वास्तविक स्वरूप और कार्यपद्धति

मोहन भागवत ने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य राजनीति में हस्तक्षेप करना या सत्ता और टिकटों का वितरण करना नहीं है। संघ का एकमात्र लक्ष्य समाज की गुणवत्ता में सुधार करना और प्रत्येक नागरिक का चरित्र निर्माण करना है। उन्होंने उन धारणाओं को भी पूरी तरह से खारिज किया जिनमें संघ को एक पैरा मिलिट्री फोर्स के रूप में देखा जाता है। भागवत के अनुसार संघ में स्वयंसेवकों का वर्दी पहनना, मार्च निकालना और लाठी का अभ्यास करना केवल अनुशासन और शारीरिक प्रशिक्षण का एक हिस्सा है और इसे किसी सैन्य संगठन की तरह समझना एक बड़ी गलतफहमी है। संघ केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है जो आगे चलकर राष्ट्र की सेवा करते हैं।

हिंदू पहचान और राष्ट्रीय एकता का सूत्र

सरसंघचालक ने हिंदू पहचान को भारत की सबसे बड़ी शक्ति और एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न मत, पंथ, संप्रदाय, भाषाएं और जातियां हो सकती हैं लेकिन हिंदू पहचान हम सभी को एक अटूट सूत्र में पिरोती है। भागवत ने दृढ़ता से कहा कि हमारी संस्कृति एक है, हमारा धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान हैं। यही साझा विरासत हमें एक राष्ट्र के रूप में जोड़कर रखती है और हमें बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी जड़ों से जुड़ते हैं, तो समाज अधिक संगठित होता है।

स्वदेशी अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत

आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए डॉ. भागवत ने स्वदेशी उत्पादों के महत्व को बहुत अधिक रेखांकित किया। उन्होंने अमेरिका जैसे देशों द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ और वैश्विक व्यापार की बदलती परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बहुत तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमें किसी विदेशी वस्तु की आवश्यकता पड़ती भी है तो वह भारत की अपनी शर्तों और जरूरतों के आधार पर होनी चाहिए। भारत अब एक ऐसा देश बन चुका है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय टैरिफ या आर्थिक दबाव से डरने वाला नहीं है। स्वदेशी का अर्थ केवल वस्तुओं से नहीं बल्कि अपनी सोच से भी है।

युवा पीढ़ी और पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण

आज की नई पीढ़ी यानी जेन जी के बारे में चर्चा करते हुए भागवत ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज में उपभोक्तावाद और पश्चिमी फैशन की अंधी नकल बहुत तेजी से बढ़ रही है जिसे रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों को भारतीय मूल्यों, संस्कारों और गौरवशाली इतिहास से अवगत कराएं। घर के आंतरिक वातावरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे घरों की दीवारों पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के चित्र हैं या केवल विदेशी पॉप स्टार्स के। उन्होंने फास्ट फूड की बढ़ती संस्कृति पर संयम रखने की सलाह दी और परिवारों को कम से कम दिन में एक बार साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा को फिर से शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

समाज निर्माण के लिए पंच परिवर्तन का आह्वान

संघ प्रमुख ने राष्ट्र की समग्र उन्नति के लिए समाज के सामने पांच प्रमुख बिंदुओं यानी पंच परिवर्तन का प्रस्ताव रखा। इन पांच बिंदुओं में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध और नागरिक अनुशासन शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में अपने स्व का बोध जागृत नहीं होगा तब तक देश की स्वतंत्रता को स्थायी नहीं बनाया जा सकता है। देश का भाग्य केवल नेताओं के निर्णयों या सरकारी नीतियों से नहीं बल्कि पूरे समाज के सामूहिक चरित्र और आचरण से तय होता है। संघ का प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।

सज्जन शक्ति का नेटवर्क और संघ की भूमिका

डॉ. भागवत ने यह भी कहा कि केवल संघ ही समाज सुधार का कार्य कर रहा है ऐसा सोचना गलत होगा। समाज के हर वर्ग और हर मत में अच्छे और सज्जन लोग मौजूद हैं जो देश की भलाई के लिए कार्य कर रहे हैं। संघ का प्रयास है कि समाज की इस सज्जन शक्ति के बीच एक मजबूत नेटवर्क बने ताकि राष्ट्र निर्माण के कार्य में गति आ सके। उन्होंने अंत में कहा कि संघ का कार्य केवल अच्छे स्वयंसेवक तैयार करना है जो आगे चलकर समाज की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे सकें। संघ की स्थापना का उद्देश्य भी यही था कि समाज को इतना सशक्त बनाया जाए कि वह अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सके।

शेयर करें: