जनता के भविष्य से जुड़ा प्रश्न
सांसद मीणा ने सदन में कहा कि डूंगरी बांध अब केवल एक विकास परियोजना नहीं है। यह पूर्वी राजस्थान की जनता के भविष्य, अस्तित्व और विश्वास से जुड़ा एक अहम प्रश्न बन चुका है।
टोंक-सवाई माधोपुर सहित आसपास के जिलों में रहने वाली जनता महीनों से अनिश्चितता और भय के माहौल में जी रही है।
डूब क्षेत्र को लेकर अस्पष्टता
लोगों के मन में लगातार यह सवाल उठ रहे हैं कि इस परियोजना से वास्तविक लाभ किसे मिलेगा। कितने गांव और घर प्रभावित होंगे, यह भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
इसके साथ ही, कितनी उपजाऊ कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आएगी, इस पर भी स्पष्टता नहीं है।
जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि इन बुनियादी प्रश्नों पर अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस, पारदर्शी और भरोसेमंद जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सांसद ने यह भी रेखांकित किया कि स्वयं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री द्वारा लोकसभा में पूर्व में दिए गए उत्तर में कहा गया था कि “कौन सा गांव डूबेगा और कितना डूबेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।”
इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर लोगों में गहरी आशंका बनी हुई है, जो सरकार और जनता के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है।
विकास का अर्थ विस्थापन नहीं
सांसद मीणा ने कहा कि जब हजारों परिवार अपनी जमीन, पहचान और पीढ़ियों की मेहनत खोने की आशंका से जूझ रहे हों, तब सरकार का दायित्व केवल कागजी योजनाओं को आगे बढ़ाना नहीं है। सरकार को हर तथ्य और निर्णय को ईमानदारी से जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास का अर्थ विस्थापन नहीं हो सकता। बिना पारदर्शिता, संवाद और जन-सहमति के कोई भी परियोजना जनहितकारी नहीं मानी जा सकती।
जनता का विश्वास जीतने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से सांसद ने मांग की कि डूंगरी बांध से जुड़े सभी निर्णय, सर्वेक्षण, डूब क्षेत्र का आकलन और प्रभाव अध्ययन सार्वजनिक किए जाएं। इससे प्रभावित होने की आशंका झेल रही जनता को स्पष्ट और भरोसेमंद जवाब मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सच्ची कसौटी जनता का विश्वास जीतने में ही निहित होती है।