thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 🌺 ज़िंदगानी 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 💡 मनचाही ▶️ YouTube
बहते शब्द

ओल्ड लैंग साइन

नीलू शेखावत नीलू शेखावत 19

पेशे से शिक्षिका! राजस्थान विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रही हैं और लिखती हैं जन की बात मन की भाषा में। फेसबुक पर बौद्धिक चेतना के शिखर वाले वर्ग में नीलू खूब पढ़ी जाती हैं। जड़ों से जुड़े विषयों पर मौलिक लेखन जो सीधा पाठक का जुड़ाव कराता है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 कोविड के हालात पर नीलू शेखावत की एक कविता
  2. 2 किस तरह से यह बीमारी हमारे जीवन का अंग बन गई
  3. 3 कोविड पर कविता
poem on covid by neelu shekhawat
sign language

▪️ओल्ड लैंग साइन▪️

खूंटियों पर लटकते मास्क
सहसा दिला देते हैं
विगत की स्मृति

बार बार साबुन से धुले खुरदरे 
ठंड में ठिठुरते हाथों को
नर्म और गर्म हथेलियों का संपुट
जिनकी यादें रच गई हो रेखाओं में

ये शब्द उन एक जोड़ी आंखों के लिए
जो देखती है डूबकर सुकून में
एकटक तुम्हारी ओर

संबंधित खबरें

neelu shekhawat kavita pahiyon par ishq

पहियों पर इश्क़

fasle poem by neelu shekhawat

फासले

neelu ki kavita rajasthan photo se matlab saheb ko

फोटू से मतलब साहेब को

सेनेटाइजर की शीशी के अलावा भी
कोई था जिसने इंतजार किया
तुम्हारा घर में कदम रखने का

ये शब्द उस शह के लिए
जिसने नहीं होने दिया दिल को दूर
दो गज की दूरी के बावजूद

यह प्यार उस कप के नाम
साल की आखिरी शाम
जो ख़त्म किया गया था

कि वक्त थम जाए
ओल्ड लैंग साइन को 
ऐसे ही गाया होगा किसी ने

संबंधित खबरें

neelu shekhawat kavita pahiyon par ishq

पहियों पर इश्क़

fasle poem by neelu shekhawat

फासले

neelu ki kavita rajasthan photo se matlab saheb ko

फोटू से मतलब साहेब को

पहली बार 
उंगलियां उलझाकर 
दिसंबर के अंतिम छोर पर

- नीलू शेखावत

शेयर करें: