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🏷️ neelu shekhawat

71 खबरें मिलीं

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सद्भावों की संकल्पना- रक्षाबंधन: रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ: स्नेह और सद्भाव का पर्व

नई दिल्ली. भारतीय संस्कृति का अद्भुत पर्व रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) श्रावणी पूर्णिमा पर भाई-बहन के स्नेह और सद्भाव की भावना को दर्शाता है. यह पर्व रक...

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राष्ट्र सेवा के प्रतीक: माणकचंद जी: पाथेय पुरुष माणकचंद जी: राष्ट्र सेवा को समर्पित जीवन

जयपुर. लेखिका नीलू शेखावत ने कुछ समय पूर्व पाथेय पुरुष माणकचंद जी (Pathya Purush Manakchand Ji) से मुलाकात की, जिन्होंने...

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अंबेडकर और महाराजा: एक अनोखा बंधन: महाराजा गायकवाड़ ने अंबेडकर को दी शिक्षा की राह

बड़ौदा. 4 जून 1913 को बड़ौदा महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ (Maharaja Sayajirao Gaekwad) ने एक 22 वर्षीय युवक (young man) को...

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पाठ्यक्रम-3 स्त्री उद्धार: उन्नीसवीं सदी में स्त्री दशा और समाज सुधार आंदोलन का सच

दिल्ली. उन्नीसवीं सदी में भारत (India) की स्त्री दशा (condition of women) और समाज सुधार (social reform) आंदोलनों को लेकर...

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पाठ्यक्रम-2 समाज सुधार या समाज संघर्ष: पाठ्यक्रम में सती प्रथा का गलत चित्रण, समाज में विद्वेष बीज

जयपुर. नीलू शेखावत (Nilu Shekhawat) ने सती प्रथा (Sati Pratha) के पाठ्यक्रम (curriculum) में चित्रण पर सवाल उठाए हैं. उन...

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पाठ्यक्रम-1: आरबीएससी पाठ्यक्रम में पलायनवादी कविता

जयपुर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की कक्षा आठ की हिंदी किताब 'वसंत' में 'हम दीवानों की क्या हस्ती' कविता (poe...

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नीलू शेखावत की कलम से: दौड़ बू (बहू) दीवाळी आयी

दीवाळी आती हुई तो बड़ी अच्छी लगती है पर जो लोग इसे लेकर आते हैं उनका जी जानता है। सबसे ज्यादा हालत खराब स्त्रियों की और...

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नीलू की कलम से: कृष्ण में आकर्षण

कृष्ण का अर्थ अब एक सांवला सलोना शिशु है जो माखन से सने मुख और हाथों संग मंद-मंद मुस्करा रहा है, वह बालक जो वनराजि के मध...

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नीलू शेखावत की कलम से: सिन्झारा

लोग अपने रीति रिवाजों को पहले से भी अधिक उत्साह से मनाने लगे हैं। हालांकि सीधे तौर पर इसका कारण बाजार ही है और बाजार की...

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नीलू शेखावत की कलम से: बस शर्म

महिला को 'शक्ति-शक्ति' कहकर अकेला मत छोड़िये। कोई महिला कितनी भी ताकतवर हो, प्रकृति की जैविक संरचना का अतिक्रम नहीं कर प...

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नीलू की कलम से: शंकर परणीजे

आज से पांच दस -साल पहले तक  स्त्रियों में इतनी उत्सुकता थी कि बेचारी दुल्हन घूंघट उठा उठाकर हैरान हो जाती थी। इतने से भी...

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