नई दिल्ली | दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक के बाद राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखे हमले किए हैं। बैठक के मुख्य केंद्र में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण किया जाना रहा। कांग्रेस ने इस फैसले को सीधे तौर पर ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर हमला बताया है और घोषणा की है कि पार्टी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी। यह बैठक हाल के विधानसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राहुल गांधी के मोदी सरकार पर गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में वन मैन शो चल रहा है जिसमें प्रधानमंत्री बिना किसी कैबिनेट सलाह या राज्यों के साथ मशविरे के बड़े फैसले ले रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार इस कार्यशैली का सीधा फायदा देश के केवल दो तीन बड़े अरबपतियों को मिल रहा है जबकि ग्रामीण इलाकों की आम जनता को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के स्वरूप को बदलना गरीबों की रोजी रोटी पर प्रहार है।राहुल गांधी ने आगे कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं थी बल्कि यह एक अधिकार आधारित अवधारणा थी। इसके माध्यम से देश के करोड़ों गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी मिलती थी। उन्होंने चेतावनी दी कि मनरेगा के ढांचे में बदलाव करना सीधे तौर पर गरीबों के कानूनी अधिकारों पर आक्रमण है। राहुल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्यों से वित्तीय शक्तियां छीन रही है और यह सत्ता के केंद्रीकरण का एक खतरनाक उदाहरण है। उनके अनुसार यह फैसला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिया गया है जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।