सवाल उठाने वालों में गैर भाजपाई मुखर हैं तो बीजेपी में मौजूद राजे विरोधी नेता दबी जुबान में इन्ही आरोपों को ऊपर तक दोहरा रहे हैं।
सीएम अशोक गहलोत ने धौलपुर में सीधे तौर पर सचिन पायलटऔर उनके धड़े को मानेसर के बहाने निशाने पर लिया। लेकिन सियासी अंदाज़ में तारीफ़ करते हुए पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को भी खुद की पार्टी में संदिग्ध बनाने की कवायद कर डाली।
रही सही कसर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ,केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र सिंह शेखावत पर यह आरोप लगाकर पूरी कर दी कि उनकी सरकार को गिराने के लिए करोड़ों रुपये दिए गए।
सवाल यह है कि अब तक पायलट पर हमलावर रहे गहलोत ने वसुंधरा के खिलाफ गुगली कैसे चल दी? जवाब है कर्नाटक के संभावित चुनाव नतीजे।
तमाम चुनावी सर्वे कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने की संभावनाओं को रेखांकित कर रहे हैं और बीजेपी के हाथ से सत्ता फिसलने का स्पष्ट इशारा कर रहे हैं। ऐसे में गहलोत को लगता है कि अब तक वसुंधरा राजे से परहेज करती रही पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की टीम 2023 और 2024 के चुनावों के मद्दे नजर फिर से वसुंधरा राजे को चुनावी मैदान में आगे नहीं कर दे।
लिहाजा गहलोत ने मोदी -शाह की निगाह में और संदिग्ध करने के लिए तारीफ के बहाने वसुंधरा पर छिपा हुआ वार कर दिया है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे अब गहलोत को ही चुभ रही हो ऐसा नहीं। सचिन पायलट भी अगले चुनाव में गहलोत और वसुंधरा राजे को प्रतिद्वंदी मानते हुए दोनों पर तीखे वार करते रहे हैं।
पायलट जानते हैं कि जनता में सीएम अशोक गहलोत भले ही उनके बराबर पॉपुलर हों न हों ,पब्लिक अपील के लिहाज से पूर्व सीएम वसुंधरा राजे इक्कीस ही हैं ,उन्नीस नहीं। जाहिर है ,चुनावी चौसर बिछ गयी है और राजे को इस बिसात से बाहर करने की प्रक्रिया में हर किसी के निशाने पर वसुंधरा राजे है।
ऐसे में यक्ष प्रश्न एक ही है -"चुनावी जरूरतों के लिहाज से मोदी -शाह की टीम राजे पर भरोसा करेंगी कि नहीं ?" लाख टके का सवाल यह भी है कि क्या वसुंधरा राजे से इतने डरे हुए हैं अशोक गहलोत कि वार भी कर रहे हैं तो तारीफ वाले अंदाज में ?