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राजनीति

मेवाड़ में भीण्डर होंगे बीजेपी का भविष्य!

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रणधीर सिंह भींडर की मेवाड़ में जनता के बीच अच्छी खासी पकड़ है​ गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद बीजेपी को मेवाड़ में चाहिए क्षत्रप राजपूत वोट बैंक को बीजेपी में लाने के लिए भैरों सिंह शेखावत ने भींडर को बीजेपी से जोड़ा था

HIGHLIGHTS

  1. 1 रणधीर सिंह भींडर की मेवाड़ में जनता के बीच अच्छी खासी पकड़ है​
  2. 2 गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद बीजेपी को मेवाड़ में चाहिए क्षत्रप
  3. 3 राजपूत वोट बैंक को बीजेपी में लाने के लिए भैरों सिंह शेखावत ने भींडर को बीजेपी से जोड़ा था
randhir singh bhindar in mewar bjp rajasthan new political situation after gulab chand kataria
रणधीर सिंह भींडर

जयपुर | नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया के राजनीतिक जीवन से विदाई और असम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के साथ ही बीजेपी में मेवाड़ के नए क्षत्रप को लेकर चर्चाएं तेज हो गयी हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर है कि गुलाब चंद कटारिया की वजह से बीजेपी से बाहर जनता सेना के सुप्रीमो रणधीर सिंह भीण्डर की बीजेपी में ससम्मान वापसी होगी या नहीं? भीण्डर के बीजेपी से अलग होने की वजह गुलाब चंद कटारिया ही रहे हैं।

एक जमाने में कटारिया खेमे के बड़े नेता रहे वल्लभनगर के पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीण्डर से कटारिया की बाद में कुछ ऐसी ठनी कि बाद में सुलह का रास्ता बन ही नहीं पाया।

गौरतलब है कि पूर्व सांसद निर्मला कुमारी शक्तावत , पूर्व मंत्री गुलाब सिंह शक्तावत और पूर्व विधायक ललित सिंह शक्तावत -बानसी  जैसे दिग्गज नेताओं के चलते कांग्रेस से मेवाड़ में राजपूतों के जुड़ाव को ख़त्म करने के लिए ही भीण्डर को भैरों सिंह शेखावत भाजपा में लेकर आये थे।

शेखावत ने मेवाड़ के पूर्व महाराणा महेंद्र सिंह को भी भाजपा से जोड़ा और भीण्डर को भी, ताकि मेवाड़ और हाड़ौती में कांग्रेस और क्षत्रिय वोट बैंक की जुगलबंदी ख़त्म की जा सके।

भैरों सिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा ने चित्तौड़गढ़ से महेंद्र सिंह मेवाड़ को लोकसभा उम्मीदवार बना कांग्रेस की सांसद रही निर्मला कुमारी शक्तावत का वर्चस्व तोड़ा था।

तब चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र चित्तौड़गढ़ जिले से इतर कोटा के रामगंजमंडी और लाडपुरा क्षेत्र तक फैला हुआ था। इसी तरह शेखावत ने वल्लभनगर में जनता दल के राव कमलेन्द्र सिंह का प्रभाव ख़त्म करने के लिए भीण्डर को आगे किया।

मेवाड़ में उस वक्त शांतिलाल चपलोत और नवनीत लाल नीनामा जैसे पुराने नेता शेखावत की पसंद थे तो भीण्डर गुलाब चंद कटारिया के। लेकिन राजस्थान की सियासत में वसुंधरा राजे का दखल बढ़ा तो कटारिया और भीण्डर की राहें बदल गयी।

कटारिया को भीण्डर एक कार्यकर्ता के रूप में तो स्वीकार्य थे लेकिन एक उभरते नेता के तौर पर नहीं। 

अब जबकि कटारिया का मेवाड़ की राजनीति में दखल ख़त्म होने जा रहा है भीण्डर की भाजपा में वापसी की संभावना प्रबल होती दिख रही है।

इसकी वजह वल्लभनगर में भीण्डर परिवार का दखल है ही, जनता सेना के बैनर तले उनका मेवाड़ और वागड़ में बढ़ता प्रभाव भी बड़े कारण के रूप में माना जा रहा है।

राजस्थान से सटे गुजरात में कांग्रेस की बजाय आम आदमी पार्टी के प्रति मतदाताओं के रुझान को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है। गुजरात के आदिवासी इलाकों में में करीब 22 फ़ीसदी वोटों को झटकने और अपना प्रभाव बढ़ाने के बाद आम आदमी पार्टी इस क्षेत्र में भी समीकरण बदलने को लेकर गंभीर है।

इसीलिए गाहे बगाहे भीण्डर को आम आदमी पार्टी के न्यौते की चर्चाओं के बीच उनकी चुप्पी की एक बड़ी वजह बीजेपी के प्रति उनके पुराने अनुराग को माना जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि भीण्डर इस बीच नए परिपेक्ष्य में राजनितिक संभावनाएं तलाशने का मन बना पाते, इससे पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं ने उन्हें थाम लिया।

जाहिर है कटारिया के अलावा बीजेपी के ज्यादातर नेता भीण्डर की भाजपा वापसी के पक्ष में हैं और उनमे मेवाड़ के क्षत्रप की संभावनाएं देख रहे हैं। ये सम्भावना कब पूरी होगी यह भीण्डर को लेकर पार्टी के भावी फैसले से ही तय होगा।

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