आरबीएससी कक्षा आठ की हिंदी किताब है- वसंत। इसमें एक पाठ के रूप में कविता 'हम दीवानों की क्या हस्ती' भी है। शीर्षक का नाम है - प्रेमियों की हस्ती।
कक्षा आठ के बालकों की उम्र का आप हिसाब लगाइये तो तेरह से चौदह वर्ष के बालक-बालिकाएं इस वर्ग के होंगे यानि किशोर वय एकदम शुरुआती स्टेज में। यह वह समय है जब बालक बालिकाओं के जीवन की दिशा तय होती है। दुनिया के प्रति नजरिया बनता है, वैचारिकता का निर्माण होता है । उस उम्र में बच्चों को साहित्य या कविताई के नाम पर आप पढ़ाएंगे-
हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले ।
मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले ।
इसके क्या मायने हैं? क्या धूल उड़ाते हुए घूमना इतना गर्वान्वित करने वाला कार्य है कि आप ठसक से किशोर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। मास्टर बेचारा खुद हैरान परेशान कि इस कविता का भावानुवाद करूँ तो क्या करूँ?