पायलट ने भाजपा की पूर्व सीएम रही वसुंधरा राजे के कंधे पर बंदुक रख सीएम गहलोत पर निशाना साध दिया है।
पायलट ने 11 अप्रैल से अनशन पर बैठने का ऐलान किया है। उनकी मांग है कि, सीएम गहलोत बार-बार कहने के बावजूद भी राजे सरकार में हुए घोटालों की जांच नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा भाजपा के घोटालों को उजागर करने का दावा झुठलाता जा रहा है।
पायलट ने मीडिया से कहा है कि, जब केन्द्र की मोदी सरकार देश के नेताओं के घोटालों को उजागर करने में लगी हैं तो राजस्थान सरकार इससे पीछे क्यों है।
इसी के साथ पायलट ने इशारों-इशारों में जनता के सामने ये भी पैगाम पहुंचाया है कि, कहीं ये गहलोत और वसुंधरा की मिली भगत तो नहीं है!
पायलट की इस अनशन की घोषणा के बाद से राजस्थान की राजनीति में भूचाल सा आ गया है।
इसी के साथ अब सचिन पायलट को कांग्रेस के अन्य नेताओं का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है।
मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने भी पायलट का समर्थन करते हुए एक इंटरव्यू में कहा है कि, वे भी भाजपा सरकार के घोटालों की जांच की मांग करने वाले सचिन पायलट के समर्थन में हैं और इस बाबत सीएम गहलोत से बात करेंगे।
पायलट ने अपने बयानों में न सिर्फ सीएम गहलोत को निशाने पर लिया, बल्कि कांग्रेस के आलाकमानों पर भी सवाल उठा दिए।
उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि, मैंने कांग्रेस लीडरशिप को भी इस बारे में अवगत कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
सचिन ने कहा कि मैंने अपने अनशन के लिए जिला प्रशासन को सूचित कर दिया है। यह अनशन ज्योतिबा फुले की जयंती पर किया जाएगा। ये अनशन भष्टचार के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि, हर पार्टी को अपनी बात पर जनता को विश्वास दिलाने के लिए प्रमाण देने पड़ता है।
सचिन पायलट के इस भारी भरकम कदम से अब सीएम अशोक गहलोत के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है।
सीएम गहलोत अब पायलट की इस मांग की अनदेखी भी नहीं कर सकते क्यों कि पायलट ने मोदी सरकार का हवाला दे दिया है और अगर गहलोत उनकी मांग पर कार्रवाई करते है तो पायलट गुट इसे सियासी मुद्दा बनाने ने पीछे नहीं रहेगा।
अब देखना ये होगा कि राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले सीएम अशोक गहलोत सचिन पायलट की इस चाल पर कौनसा दांव खेलते हैं।