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राजस्थान

न्याय के लिए भटकती अध्यापिका, 12 मार्च से परिवार सहित अनशन का ऐलान

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HIGHLIGHTS

  1. 1 वीरवाड़ा (पिंडवाड़ा) निवासी अध्यापिका टीना सुथार न्याय के लिए भटकने को मजबूर। महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, वेलागरी में एक वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापना हुई थी।
  2. 2 प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के बाद मूल पद पर भेजने के लिए विभाग को आवेदन किया।
  3. 3 विभाग ने कार्रवाई के बजाय उच्च स्तर से मार्गदर्शन मांगकर मामला लंबित रखा।
  4. 4 17 जुलाई 2025 को न्यायालय ने 4 सप्ताह में मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए थे।
teacher to begin hunger strike with family from march 12 seeking justice in sirohi

सिरोही। जिला शिक्षा विभाग की कथित लापरवाही का खामियाजा एक निर्दोष अध्यापिका को भुगतना पड़ रहा है। वीरवाड़ा (तहसील पिंडवाड़ा) निवासी अध्यापिका टीना सुथार ने न्याय नहीं मिलने पर अब 12 मार्च से परिवार सहित अनशन पर बैठने का निर्णय लिया है।

जानकारी के अनुसार टीना सुथार अध्यापिका पद पर कार्यरत रहते हुए महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, वेलागरी में एक वर्ष के लिए पदस्थापित की गई थीं। एक वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने प्रतिनियुक्ति निरस्त कर अपने मूल पद पर पुनः स्थापना के लिए विभाग को आवेदन किया।

बताया जा रहा है कि इस संबंध में विभाग ने उच्च स्तर से मार्गदर्शन मांगकर औपचारिकता पूरी कर दी, लेकिन लंबे समय तक उन्हें मूल पद पर वापस नहीं भेजा गया। लगातार भटकने के बावजूद जब टीना सुथार को न्याय नहीं मिला तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली।

माननीय न्यायालय ने 17 जुलाई 2025 को आदेश देते हुए टीना सुथार को चार सप्ताह के भीतर उनके मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए थे। हालांकि न्यायालय के आदेश को सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सिरोही जिला शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग द्वारा केवल उच्च स्तर से मार्गदर्शन मांगने की प्रक्रिया अपनाई गई है।

अध्यापिका टीना सुथार का कहना है कि उन्होंने कई बार विभाग को आवेदन दिए और न्यायालय के आदेशों का हवाला भी दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। ऐसे में मजबूर होकर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सिरोही कार्यालय के सामने 12 मार्च से अपने परिवार के साथ अनशन करने का निर्णय लिया है।

टीना सुथार ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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