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राजनीति

क्या इस बार कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बन रहा सियासी मुद्दा

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Karnataka Election 2023: कर्नाटक की जनता कई मुद्दों को लेकर अपने मतदान का प्रयोग करेगी। ऐसे में यहां पिछले डेढ़ सौ साल से चला आ रहा कावेरी जल विवाद भी क्या इस बार सियासी मुद्दा बना हुआ है। अगर हां तो क्या ये चुनावी समीकरणों को बिगाड़ेगा ? 

HIGHLIGHTS

  1. 1 Karnataka Election 2023: कर्नाटक की जनता कई मुद्दों को लेकर अपने मतदान का प्रयोग करेगी। ऐसे में यहां पिछले डेढ़ सौ साल से चला आ रहा कावेरी जल विवाद भी क्या इस बार सियासी मुद्दा बना हुआ है। अगर हां तो क्या ये चुनावी समीकरणों को बिगाड़ेगा ? 
what is kaveri dispute is political issue on karnataka assembly elections 2023

कर्नाटक | Karnataka Election 2023:  कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 का घमासान जोरों पर है। 

इस बार कर्नाटक की जनता कई मुद्दों को लेकर अपने मतदान का प्रयोग करेगी। 

ऐसे में यहां पिछले डेढ़ सौ साल से चला आ रहा कावेरी जल विवाद भी क्या इस बार सियासी मुद्दा बना हुआ है। अगर हां तो क्या ये चुनावी समीकरणों को बिगाड़ेगा ? 

क्या है कावेरी जल विवाद ? एक नजर में....

कावेरी नदी के जल के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों में गम्भीर विवाद है। इस विवाद की जड़ें भूतपूर्व मद्रास प्रेसिडेन्सी और किंगडम ऑफ़ मैसूर के बीच 1892 एवं 1924 में हुए दो समझौते हैं। 

इसी बीच 1974 में कर्नाटक ने तमिलनाडु की सहमती लिए बिना अपने चार नए वॉटर पॉड बनाकर पानी को मोड दिया। ऐसे में तमिलनाडु ने इसे समझौतों का उल्लंघन करार दिया और विवाद शुरू हो गया। 

802 किलोमीटर (498 मील) कावेरी नदी में तमिलनाडु में 44,000 किमी 2 बेसिन क्षेत्र और कर्नाटक में 32,000 किमी 2 बेसिन क्षेत्र है। 

कर्नाटक का प्रवाह 425 टीएमसी फीट है, जबकि तमिलनाडु का 252 टीएमसी फीट।

इस प्रवाह के आधार पर कर्नाटक नदी से पानी का उचित हिस्सा मांग रहा है। 

लेकिन अब कहा जा रहा है कि स्वतंत्रता पूर्व जो समझौते हुए हैं वह अमान्य हैं जिसके चलते अब फिर से समान बंटवारे के आधार पर पुनः समझौता करने की मांग की जा रही है। 

लेकिन इस बार होने जा रहे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कावेरी जल मुद्दा बिल्कुल शांत नजर आ रहा है और इसे चुनावों में किसी ने भी मुद्दा नहीं बनाया है। 

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