जयपुर | राजस्थान की पारंपरिक माटी कला को अब आधुनिक तकनीक और सरकारी संरक्षण का साथ मिलने जा रहा है। श्रीयादे माटी कला बोर्ड की बैठक में कारीगरों के कल्याण के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं।
राजस्थान माटी कला बोर्ड का बड़ा फैसला: राजस्थान में माटी कला को नई पहचान, मिलेंगे 5000 इलेक्ट्रिक चाक
श्रीयादे माटी कला बोर्ड की बैठक में कारीगरों के लिए बड़े फैसलों पर मुहर लगी।
HIGHLIGHTS
- माटी कामगारों को श्रमिक श्रेणी में शामिल कर श्रमिक कार्ड जारी करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 5000 इलेक्ट्रिक चाक और मशीनें दी जाएंगी।
- बिचून में प्रशिक्षण और नवाचार के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना की जाएगी।
- यूनिटी मॉल में माटी कला उत्पादों के लिए स्थायी बाजार और स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
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माटी कला को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी
जयपुर के उद्योग भवन में आयोजित बैठक में बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने कहा कि माटी कला हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे संजोना और प्रोत्साहित करना समय की मांग है।
राज्य सरकार अब कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे उनकी कला को न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक नई पहचान मिलेगी।
"पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ना ही कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है।" - प्रहलाद राय टाक
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आवा-कजावा प्रोत्साहन नीति और श्रमिक कार्ड
बैठक में 'आवा-कजावा' (माटी कला) के संरक्षण के लिए एक नई प्रोत्साहन नीति बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। यह नीति ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में काफी मददगार साबित होगी।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव माटी कामगारों को 'श्रमिक' श्रेणी में शामिल करने का है। इससे उन्हें श्रमिक कार्ड मिल सकेगा, जो उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने में सहायक होगा।
श्रमिक कार्ड के जरिए अब इन कारीगरों को बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। यह उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
5000 इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनें
कारीगरों की मेहनत को कम करने और उनके उत्पादन को बढ़ाने के लिए 5000 इलेक्ट्रिक चाक दिए जाएंगे। इसके अलावा मिट्टी गूंथने की मशीनें भी उपलब्ध कराने पर विचार हुआ है।
विपणन को बढ़ावा देने के लिए जयपुर के यूनिटी मॉल में माटी कला उत्पादों के लिए विशेष स्थान आवंटित किया जाएगा। इससे कारीगर सीधे बड़े बाजार और ग्राहकों से जुड़ सकेंगे।
उद्योग भवन में ही कलाकारों के लिए लाइव प्रदर्शन (लाइव डेमोंस्ट्रेशन) की जगह दी जाएगी। यहाँ आमजन मिट्टी के बर्तन बनते देख सकेंगे और उन्हें सीधे कारीगरों से खरीद भी सकेंगे।
बिचून में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
माटी कला के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के लिए बिचून में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा। इसके लिए भूमि आवंटन के विषय पर गंभीरता से विचार किया गया है।
यह केंद्र भविष्य में कारीगरों के लिए नई तकनीकों को सीखने का प्रमुख हब बनेगा। बैठक में एसीएस शिखर अग्रवाल सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और बोर्ड सदस्य मौजूद रहे।
इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करना है। सरकार चाहती है कि माटी कला से जुड़े हजारों परिवारों को उनकी मेहनत का सही मोल मिल सके।
राजस्थान सरकार के ये कदम माटी के जादूगरों के जीवन में नई रोशनी लाएंगे। तकनीक, बाजार और सामाजिक सुरक्षा का यह संगम इन कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा।
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