सिरोही | राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा घोषित आरएएस परीक्षा 2023 के परिणामों ने कई परिवारों की किस्मत बदल दी है। लेकिन सिरोही जिले के झाड़ोली गांव से एक ऐसी खबर आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। यहाँ एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों ने एक साथ आरएएस (RAS) बनकर इतिहास रच दिया है। इस शानदार सफलता के बाद पूरे जिले में जश्न का माहौल है और लोग इस परिवार की मिसाल दे रहे हैं।
राजस्थान: 3 सगे भाई-बहन बने RAS अफसर: राजस्थान के सिरोही में कमाल: एक ही घर के तीन सगे भाई-बहन एक साथ बने RAS अफसर, छोटे भाई ने हासिल की 24वीं रैंक
राजस्थान के सिरोही जिले के झाड़ोली गांव के तीन सगे भाई-बहनों ने आरएएस परीक्षा 2023 में सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया है। परमवीर सिंह, सेजल कुंवर और महिपाल सिंह की इस उपलब्धि से पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है।
HIGHLIGHTS
- सिरोही के झाड़ोली गांव के तीन सगे भाई-बहनों ने एक साथ आरएएस परीक्षा पास की।
- सबसे छोटे भाई परमवीर सिंह ने पूरे राजस्थान में 24वीं रैंक हासिल कर नाम रोशन किया।
- बहन सेजल कुंवर को 120वीं और बड़े भाई महिपाल सिंह को 931वीं रैंक मिली।
- तीनों ने बिना किसी बड़े कोचिंग के घर पर रहकर स्वाध्याय (Self-study) से सफलता पाई।
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एक साथ मिली बड़ी कामयाबी
सिरोही जिले के झाड़ोली गांव के रहने वाले परमवीर सिंह, उनकी बहन सेजल कुंवर और बड़े भाई महिपाल सिंह ने आरएएस परीक्षा में अपनी जगह बनाई है। यह संभवतः जिले का पहला ऐसा मामला है जहाँ एक ही छत के नीचे तीन अफसर तैयार हुए हैं। सबसे छोटे भाई परमवीर सिंह ने इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे राजस्थान में 24वीं रैंक हासिल की है।वहीं उनकी बहन सेजल कुंवर ने 120वीं रैंक और सबसे बड़े भाई महिपाल सिंह ने 931वीं रैंक प्राप्त की है। इन तीनों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। गांव के लोग इस उपलब्धि को देखकर फूले नहीं समा रहे हैं।
पहले से ही सेवा में हैं दो भाई-बहन
खास बात यह है कि परमवीर सिंह और सेजल कुंवर का चयन पिछली आरएएस परीक्षा में भी हो चुका था। परमवीर ने अपने पहले ही प्रयास में 66वीं रैंक हासिल की थी और वे वर्तमान में डीएसपी पद के लिए जयपुर में ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने अपनी रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दी और इस बार 24वीं रैंक लाकर सबको चौंका दिया।वहीं बहन सेजल कुंवर ने भी अपनी पिछली 522वीं रैंक में बड़ा सुधार किया है। वह वर्तमान में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक (Enforcement Inspector) के पद पर जोधपुर में कार्यरत हैं। इस बार उनकी 120वीं रैंक आने से उन्हें और भी बेहतर पद मिलना तय है। बड़े भाई महिपाल सिंह के लिए यह तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता का स्वाद चखा।
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शिक्षक पिता का रहा अहम योगदान
इन तीनों सफल अभ्यर्थियों के पिता लालसिंह सिरोही जिले के ही राजपुरा बालदा गांव में द्वितीय श्रेणी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनकी माता एक कुशल गृहिणी हैं। पिता लालसिंह ने बताया कि उनके बच्चों ने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। घर के माहौल को हमेशा पढ़ाई के अनुकूल रखा गया, जिससे बच्चों को एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिली।शिक्षक पिता के मार्गदर्शन और माता के सहयोग ने इन तीनों भाई-बहनों के सपनों को पंख दिए। लालसिंह का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को ईमानदारी से मेहनत करने की सीख दी। आज जब तीनों बच्चे एक साथ अधिकारी बन गए हैं, तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। उनके अनुसार, यह उनकी जिंदगी का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है।
सेल्फ स्टडी से पाया मुकाम
आज के दौर में जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाखों रुपये कोचिंग पर खर्च किए जाते हैं, वहीं इन भाई-बहनों ने एक अलग मिसाल पेश की है। तीनों ने घर पर रहकर ही स्वाध्याय (Self-study) के माध्यम से अपनी तैयारी पूरी की। उन्होंने इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों का सही इस्तेमाल किया और नियमित रूप से अभ्यास किया।उनके मामा उदय प्रताप सिंह, जो स्वयं एक आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं, बताते हैं कि तीनों का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाना था। उन्होंने बताया कि तीनों भाई-बहन एक-दूसरे की ताकत बने और पढ़ाई में आने वाली समस्याओं को मिलकर सुलझाया। इसी आपसी सहयोग ने उन्हें इस बड़ी सफलता तक पहुँचाया है।
पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत
झाड़ोली गांव में अब हर तरफ इन तीनों भाई-बहनों की चर्चा हो रही है। ग्रामीण और रिश्तेदार लगातार उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इनकी सफलता की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। यह कहानी राजस्थान के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं।प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए परमवीर, सेजल और महिपाल एक मिसाल बन चुके हैं। उनकी यह कहानी बताती है कि ग्रामीण परिवेश में रहकर भी ऊंचे सपने देखे जा सकते हैं और उन्हें पूरा भी किया जा सकता है। अब यह तीनों भाई-बहन समाज सेवा के अपने नए सफर की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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