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भारत

ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: भारत में ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: केंद्र सरकार की नई योजनाओं और रणनीतियों का हुआ खुलासा

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

केंद्र सरकार 'स्वदेश दर्शन' और 'प्रसाद' जैसी योजनाओं के माध्यम से देश के पर्यटन स्थलों को विकसित कर रही है। ग्रामीण पर्यटन के लिए एक नई राष्ट्रीय रणनीति भी तैयार की गई है।

HIGHLIGHTS

  • पर्यटन मंत्रालय 'स्वदेश दर्शन 2.0' और 'प्रसाद' जैसी योजनाओं के जरिए पर्यटन बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है।
  • ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति और प्रारूप तैयार किया गया है।
  • वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एकीकृत विपणन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं।
  • राज्य सरकारों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के आधार पर पर्यटन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
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नई दिल्ली | भारत सरकार देश में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठा रही है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

प्रमुख योजनाओं के माध्यम से विकास

पर्यटन मंत्रालय अपनी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग कर रहा है। इसमें 'स्वदेश दर्शन (SD)' और 'स्वदेश दर्शन 2.0 (SD2.0)' जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, धार्मिक स्थलों के कायाकल्प के लिए 'प्रसाद' (PRASHAD) योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (CBDD) के माध्यम से भी पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। ये योजनाएं पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के निर्माण में वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। यह सहायता राज्यों द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और निधि की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

ग्रामीण पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीति

मंत्रालय ने भारत में ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए 'आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक पहल' नामक एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की है। यह रणनीति ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसके तहत ग्रामीण पर्यटन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों और प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाएगा।रणनीति के मुख्य स्तंभों में ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर विकसित करना और विपणन सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके साथ ही, हितधारकों की क्षमता निर्माण और एक मजबूत संस्थागत ढांचे के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। इस प्रारूप को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है ताकि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।

वैश्विक स्तर पर भारत का प्रचार

भारत को दुनिया के पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए एक एकीकृत विपणन और प्रचार रणनीति अपनाई गई है। इसमें विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और ट्रैवल ट्रेड भागीदारों का सक्रिय सहयोग लिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वैश्विक पर्यटन बाजार में भारत की कुल हिस्सेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।प्रचार गतिविधियों के तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल फेयर, प्रदर्शनियों और रोड शो का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही, भारतीय खाद्य और सांस्कृतिक उत्सवों के माध्यम से दुनिया को भारत की विविधता से परिचित कराया जा रहा है। विदेशी टूर ऑपरेटरों को सहायता और वैश्विक मीडिया अभियानों के जरिए भारत के धार्मिक और ग्रामीण पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

राज्यों की भूमिका और भविष्य की राह

पर्यटन स्थलों का विकास और प्रचार मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार उन्हें तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। पर्यटन परियोजनाओं की सफलता के लिए समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य बनाया गया है।इन प्रयासों से न केवल पर्यटन क्षेत्र को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का भी संरक्षण होगा। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। धार्मिक पर्यटन के विकास से तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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