Highlights
- राष्ट्रीय कवि शैलेष लोढ़ा 37 साल बाद अपने पुराने क्लास रूम पहुंचे और भावुक हो गए।
- प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर टीना रांका ने भी समारोह में शिरकत कर पुरानी यादें साझा कीं।
- पूर्व छात्रों ने कॉलेज के विकास के लिए कुल 12.53 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
- समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पूर्व शिक्षकों और मेधावी छात्रों का सम्मान किया गया।
सिरोही पीजी कॉलेज में यादों का संगम
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को एक भव्य और भावनात्मक पूर्व छात्र स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में देश और दुनिया के विभिन्न कोनों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले कॉलेज के पूर्व छात्रों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध राष्ट्रीय कवि और टीवी अभिनेता शैलेष लोढ़ा रहे। शैलेष लोढ़ा जब पूरे 37 साल बाद उस क्लास रूम में पहुंचे जहां उन्होंने साल 1988 में अपनी पढ़ाई की थी तो वह बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने क्लास की उसी पुरानी बेंच पर कुछ समय अकेले बिताया और ब्लैक बोर्ड को निहारते रहे जैसे वह अपने बीते हुए कल को फिर से जी रहे हों।
शैलेष लोढ़ा की भावुक यादें
शैलेष लोढ़ा ने अपने संबोधन में अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि सिरोही उनके मन में बसता है। उन्होंने अपने बचपन और युवावस्था की यादों को साझा करते हुए बताया कि आज भी जब वह रात को सोने के लिए अपनी आंखें बंद करते हैं तो सिरोही की गलियां उनकी आंखों के सामने जीवंत हो उठती हैं। उन्होंने कॉलेज के दिनों की शरारतों को याद करते हुए बताया कि कैसे वह अपने दोस्तों के साथ साइकिल पर पूरी मस्ती के साथ घूमा करते थे। चाय पीने के लिए दोस्तों के बीच पर्ची निकाली जाती थी ताकि यह तय हो सके कि उस दिन का बिल कौन भरेगा। उन्होंने मंच पर अपने उन पुराने सहपाठियों को बुलाकर उन्हें सम्मानित भी किया जिनके साथ उन्होंने कॉलेज की दहलीज पर कदम रखा था।
फैशन डिजाइनर टीना रांका ने साझा किए अनुभव
इस एलुमनाई मीट में देश की जानी-मानी फैशन डिजाइनर टीना रांका भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। टीना रांका इसी कॉलेज के साल 2003 बैच की छात्रा रही हैं। उन्होंने हाल ही में प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिवल में रेड कारपेट पर चलने वाली पहली महिला डिजाइनर बनने का गौरव हासिल कर सिरोही का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। टीना ने बताया कि इस कार्यक्रम ने उन्हें कॉलेज के पुराने शहनाई कार्यक्रम की याद दिला दी। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उन दिनों कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का बहुत ज्यादा क्रेज होता था और वह स्वयं भी इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। इतने वर्षों बाद अपने पुराने दोस्तों से मिलकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
कॉलेज विकास के लिए पूर्व छात्रों का बड़ा योगदान
समारोह के दौरान पूर्व छात्रों ने अपनी मातृसंस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कॉलेज के विकास के लिए खुले दिल से दान दिया। कॉलेज की सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए कुल 12.53 लाख रुपये की राशि भेंट की गई। इसमें अहमदाबाद के प्रसिद्ध व्यवसायी ललित कुमार गांधी ने 5.51 लाख रुपये और समाजसेवी राजेश रुपावत ने भी 5.51 लाख रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त दुबई के व्यवसायी राम अग्रवाल ने 1.51 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस राशि का उपयोग कॉलेज के बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों के लिए नई सुविधाओं को विकसित करने में किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अजय शर्मा ने बताया कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए पिछले एक महीने से कॉलेज प्रशासन और पूर्व छात्र परिषद तैयारियों में जुटे हुए थे। कार्यक्रम में वर्तमान और पूर्व छात्रों ने गीतों और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। प्रोफेसर गायत्री प्रसाद के अनुसार इस सम्मेलन में देशभर से आए डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील और कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं। इन सभी ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों से जिले और कॉलेज का नाम पूरे देश में गौरवंवित किया है। कॉलेज परिसर में चारों ओर उत्साह और पुरानी दोस्ती की झलक देखने को मिल रही थी।
शिक्षकों और पूर्व छात्र नेताओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के उन पूर्व प्राचार्यों और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा है। सम्मानित होने वाले शिक्षकों में पीआर धानेटिया, सुशीला रील, गुलबाराम गोयल, पुष्पा गुप्ता और वीरेंद्र कुमार भाटिया जैसे दिग्गज नाम शामिल थे। इस स्नेह मिलन समारोह में कॉलेज के प्रथम छात्रसंघ अध्यक्ष सुल्तान सिंह देवड़ा सहित कई पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर पूर्व छात्र परिषद में 70 से अधिक नए आजीवन सदस्य भी बने जो भविष्य में कॉलेज की प्रगति के लिए कार्य करेंगे।
विद्यार्थी जीवन के अनुभवों का महत्व
शैलेष लोढ़ा ने कार्यक्रम के दौरान विज्ञान संकाय की कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का भी विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि एक विद्यार्थी के रूप में बिताया गया समय जीवन का सबसे अनमोल और सीखने वाला समय होता है। उन्होंने वर्तमान छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि कड़ी मेहनत, ईमानदारी और अपनी जड़ों से जुड़ाव ही जीवन में सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने कहा कि वह भले ही आज मुंबई में रहते हों लेकिन उनका दिल हमेशा सिरोही की मिट्टी के लिए धड़कता है।
आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्व छात्र परिषद के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, संरक्षक बीआर गोयल और उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह डाबी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कोषाध्यक्ष आशुतोष पटनी और कार्यालय सचिव डॉक्टर खेमराज चौधरी ने सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया। कार्यक्रम के अंत में डॉक्टर खेमराज चौधरी ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल एक मिलन समारोह था बल्कि इसने पुरानी यादों को नई ऊर्जा के साथ जोड़ने का काम किया। सिरोही पीजी कॉलेज का यह एलुमनाई मीट जिले के शैक्षिक और सामाजिक इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
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