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राज्य

WhatsApp पर गई 6000 नौकरियां!: WhatsApp मैसेज से 6000 कर्मी बर्खास्त, वेतन भी नहीं

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही में संविदा कर्मी धरने पर। WhatsApp मैसेज से 6000 लोगों की नौकरी गई, 4 महीने से वेतन भी नहीं मिला।

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HIGHLIGHTS

  • WhatsApp मैसेज से 6000 संविदा कर्मियों की नौकरी खत्म।
  • कर्मचारियों को 4 महीने से वेतन नहीं मिला है।
  • सरकार पर 'नियम 25' का गलत इस्तेमाल करने का आरोप।
  • कर्मचारियों ने जयपुर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही में सरकारी अस्पताल के बाहर माहौल गर्म है। यहां सैकड़ों संविदा स्वास्थ्य कर्मी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इनकी नौकरी एक झटके में चली गई, और खबर मिली एक WhatsApp मैसेज से। यह कहानी सिर्फ सिरोही की नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के 6,000 परिवारों की है।

एक WhatsApp मैसेज और 6000 जिंदगियां दांव पर

पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नौकरी से हटाने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।

30 तारीख को अस्पताल के एक WhatsApp ग्रुप में एक मैसेज आता है।

मैसेज में लिखा था कि 'जीएस कंपनी' द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।

इस एक मैसेज ने राजस्थान के लगभग 6,000 संविदा कर्मियों को बेरोजगार कर दिया।

बिना नोटिस, बिना सूचना

नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी को हटाने से पहले 3 महीने का नोटिस देना अनिवार्य होता है।

लेकिन यहां किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

कर्मचारियों को सीधे WhatsApp पर फरमान सुना दिया गया, जो उनके लिए एक बड़ा झटका था।

नियमों का खुला उल्लंघन?

इन सभी कर्मचारियों को 'राजमेश' के तहत टेंडर प्रक्रिया से नौकरी पर रखा गया था।

उनके एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि जब तक कोई स्थाई कर्मचारी नहीं आता, उन्हें नहीं हटाया जाएगा।

संविदा नियमों के अनुसार, एक संविदा कर्मचारी को हटाकर उसकी जगह दूसरे संविदा कर्मचारी को नहीं रखा जा सकता।

"हमें हटाने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। 30 तारीख को एक WhatsApp ग्रुप में मैसेज आया कि हमारी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।"

क्या है 'नियम 25' का खेल?

प्रशासन ने 'नियम 25' का हवाला देकर इन कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

यह नियम विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल होता है।

लेकिन अब सरकार कर्मचारी चयन बोर्ड के जरिए दोबारा नए लोगों को 5 साल के संविदा एग्रीमेंट पर ही भर्ती कर रही है।

पुराने कर्मचारियों का कहना है कि यह उनके साथ धोखा और नियमों का सीधा उल्लंघन है।

वेतन नहीं, सिर्फ शोषण?

मामला सिर्फ नौकरी छीनने तक ही सीमित नहीं है। इन कर्मचारियों का शोषण कई स्तरों पर हुआ है।

निकाले गए इन कर्मियों को पिछले 4 महीने से कोई वेतन ही नहीं दिया गया है।

परिवार चलाना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे निकालना भी मुश्किल हो गया है।

कागजों में बढ़ा वेतन, खातों में नहीं आया

इतना ही नहीं, पिछले साल जून में राजमेश के आदेश से इन कर्मियों का वेतन बढ़ाया गया था।

उनकी सैलरी लगभग 8,000 रुपये से बढ़ाकर 13,144 रुपये कर दी गई थी।

लेकिन यह बढ़ा हुआ वेतन सिर्फ कागजों में ही रहा। उनके बैंक खातों में कभी नहीं पहुंचा।

धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कोर्ट में स्टे भी लगाया है। उनकी मांग है कि उन्हें हटाए जाने का आदेश रद्द कर 2022 सीएसआर रूल्स के तहत उनके पदों पर वापस रखा जाए। अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे जयपुर कूच कर राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन करेंगे।

*Edit with Google AI Studio

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