सिरोही |
सिरोही: रामझरोखा मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के परिवाद पर न्यायालय ने पुलिस को महंत सीतारम के खिलाफ रिर्पोट दर्ज करने के दिए निर्देश
सिरोही में रामझरोखा मंदिर की बेशकीमती जमीन फर्जी वसीयत बनाकर बेचने का आरोप। ट्रस्टी की याचिका पर कोर्ट ने महंत सीतारामदास के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।
HIGHLIGHTS
- रामझरोखा मंदिर की बेशकीमती जमीन फर्जी वसीयत से बेचने का आरोप।
- ट्रस्टी नटवरलाल पटेल ने महंत सीतारामदास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
- पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने पर ट्रस्टी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
- न्यायालय ने सिरोही पुलिस को महंत के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।
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सिरोही स्थित रामझरोखा मंदिर की बेशकीमती भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने के मामले में न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मंदिर के एक ट्रस्टी द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने पुलिस को आरोपी महंत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रामझरोखा मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी और नियंत्रण एवं सलाहकार समिति के अध्यक्ष नटवरलाल पटेल ने यह परिवाद दायर किया था। पटेल के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली कि ब्रह्मलीन महंत जयरामदास के शिष्य सीतारामदास ने अपने गुरु की वसीयत से छेड़छाड़ की है। 
फर्जी वसीयत से जमीन बेचने का आरोप
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पटेल ने आरोप लगाया कि सीतारामदास ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर एक फर्जी वसीयत तैयार की। इसी फर्जी वसीयत का उपयोग करके मंदिर की बहुमूल्य भूमि का उपविभाजन किया गया और उसे बेच दिया गया। 
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चला कि सभी विक्रय विलेख 8.3.2001 की एक वसीयत पर आधारित थे। पटेल को जब इस वसीयत की प्रति मिली, तो उसमें उनके और देवाराम नामक एक अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर थे, जिसे उन्होंने फर्जी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दिवंगत महंत और देवाराम के हस्ताक्षर भी मेल नहीं खाते।
असली वसीयत की शर्तें
नटवरलाल पटेल ने बताया कि महंत जयरामदास ने अपनी एकमात्र वसीयत 20.3.2001 को बनाई थी। इस वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखा था कि मंदिर से जुड़ी किसी भी चल-अचल संपत्ति के लेनदेन या विक्रय के लिए नियंत्रण एवं सलाहकार समिति की सहमति अनिवार्य है। इसके बावजूद, सीतारामदास ने दस्तावेजों में हेरफेर कर भूमि बेच दी।
पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई
इस मामले को लेकर पटेल ने 8.12.2025 को सिरोही पुलिस थाने में रिपोर्ट पेश की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद, उन्होंने 22.12.2025 को पुलिस अधीक्षक को भी डाक द्वारा सूचित किया, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
न्यायालय का दरवाजा खटखटाया
पुलिस से कोई सहायता न मिलने पर, पटेल ने 27.1.2026 को जिला एवं सेशन न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिवाद और तथ्यात्मक रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मामले को सुना।
न्यायालय का सख्त आदेश
न्यायालय ने माना कि यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। अपने 3.7.2026 के फैसले में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सिरोही पुलिस थाने को धारा 175 (3) बी.एन.एस.एस. के तहत प्रकरण दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन धाराओं में अपराध प्रकट होता है, उनमें मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया जाए और रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए।