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राजस्थान

संस्कृत शिक्षा का संकट: सिरोही: 185 में से 136 शिक्षक पद खाली, कैसे पढ़ें छात्र?

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही जिले में संस्कृत शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। 22 स्कूलों में 185 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 49 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे 136 पद रिक्त हैं। कई स्कूल प्रतिनियुक्ति के सहारे चल रहे हैं।

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HIGHLIGHTS

  • सिरोही के 22 संस्कृत स्कूलों में 185 में से 136 शिक्षक पद खाली।कुल 1508 छात्रों के लिए केवल 49 शिक्षक कार्यरत हैं।गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षकों की भारी कमी।कई स्कूल प्रतिनियुक्ति के सहारे चल रहे हैं, शिक्षण व्यवस्था प्रभावित।
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सिरोही |रक्षा बंधन पर्व के साथ संस्कृत दिवस पर सिरोही जिले में संस्कृत शिक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिले के संस्कृत शिक्षा विभाग के विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में है।

 

शिक्षकों की भारी कमी से जूझते संस्कृत विद्यालय

जिले के संस्कृत शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वरिष्ठ उपाध्याय (12वीं तक) और राजकीय संस्कृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की संख्या के आंकड़े निराशाजनक हैं।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, सिरोही जिले के कुल 22 संस्कृत विद्यालयों में 1508 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यालयों के लिए कुल 185 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 49 शिक्षक ही कार्यरत हैं।

इसके परिणामस्वरूप, 136 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का लगभग 74% है। इस कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

स्कूल-वार रिक्तियों का विवरण

शिक्षकों की कमी की समस्या लगभग हर स्कूल में व्याप्त है। कुछ स्कूलों की स्थिति तो और भी गंभीर है, जहां एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है और व्यवस्था प्रतिनियुक्ति के सहारे चल रही है।

वरिष्ठ उपाध्याय (12वीं तक) विद्यालयों की स्थिति

जिले के 12वीं स्तर के संस्कृत विद्यालयों में हालात बेहद खराब हैं। प्रमुख विषयों जैसे गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के अधिकांश पद खाली पड़े हैं।

  • झाडोली: 17 स्वीकृत पदों में से मात्र 5 कार्यरत, 12 पद रिक्त।
  • बावली: 16 स्वीकृत पदों में से 4 कार्यरत, 12 पद रिक्त।
  • वलदरा: 16 स्वीकृत पदों में से 3 कार्यरत, 13 पद रिक्त।
  • नई जमीन: 11 स्वीकृत पद और सभी पद रिक्त, स्कूल प्रतिनियुक्ति पर चल रहा है।
  • नागाणी: 12 स्वीकृत पदों में से 3 कार्यरत, 9 पद रिक्त।
  • कृष्णगंज: 13 स्वीकृत पदों में से 5 कार्यरत, 8 पद रिक्त।
  • गोलियावास उमरणी: 16 स्वीकृत पदों में से 5 कार्यरत, 11 पद रिक्त।
  • मूंगथला: 14 स्वीकृत पदों में से 5 कार्यरत, 9 पद रिक्त।

उच्च प्राथमिक (8वीं तक) विद्यालयों का हाल

आठवीं कक्षा तक के संस्कृत विद्यालयों में भी शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे प्राथमिक स्तर की शिक्षा की नींव कमजोर हो रही है।

  • झाडोली (UP): 6 की जगह 2 कार्यरत, 4 पद रिक्त।
  • जियापुरा-कोजरा: 4 की जगह 1 कार्यरत, 3 पद रिक्त।
  • गोलिया नांदिया: 4 स्वीकृत पद, एक भी शिक्षक नहीं, प्रतिनियुक्ति से चल रहा काम।
  • सिलवणी: 4 स्वीकृत पद, एक भी शिक्षक नहीं, प्रतिनियुक्ति से संचालन
  • पोसालिया: 6 की जगह मात्र 1 कार्यरत, 5 पद रिक्त।
  • बोसनी की ढाणी (उथमण): 4 की जगह 1 कार्यरत, 3 पद रिक्त।
  • गणेशनगर-बड़गांव: 5 की जगह 1 कार्यरत, 4 पद रिक्त।
  • डोड़ुआ: 6 की जगह 3 कार्यरत, 3 पद रिक्त।
  • सिरोड़ी: 6 की जगह 2 कार्यरत, 4 पद रिक्त।
  • अनादरा: 4 की जगह 1 कार्यरत, 3 पद रिक्त।
  • आबूरोड: 5 की जगह 3 कार्यरत, 2 पद रिक्त।
  • वराडा: 6 की जगह 1 कार्यरत, 5 पद रिक्त।
  • डबानी: 4 की जगह 1 कार्यरत, 3 पद रिक्त।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज

वलदरा गांव के जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश पुरोहित 'जुगनू' ने अपने गांव के स्कूल की दुर्दशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वलदरा के वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत मात्र दो तृतीय श्रेणी शिक्षक हैं और एक शिक्षक को अन्य स्कूल से प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि प्रधानाचार्य, सभी व्याख्याता, सभी विषय-अध्यापक और तृतीय श्रेणी के पांच पद रिक्त हैं। इसके साथ ही यूडीसी का पद भी खाली है। अंग्रेजी, विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षक न होने से छात्रों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पलायन को मजबूर छात्र

जिले में संस्कृत शिक्षा में शिक्षकों के अधिकतर पद रिक्त होने से शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। इसके चलते कई अभिभावक अपने बच्चों को इन स्कूलों से निकालकर अन्यत्र पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

*Edit with Google AI Studio

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