इथेनॉल फैक्ट्री विवाद: हनुमानगढ़ इथेनॉल फैक्ट्री: बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा

हनुमानगढ़ (Hanumangarh) के टिब्बी (Tibbi) क्षेत्र में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री (Ethanol Factory) के खिलाफ आंदोलन का मुद्दा लोकसभा (Lok Sabha) में उठा। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने पुलिस लाठीचार्ज की निंदा की।

Hanuman beniwal

जयपुर: हनुमानगढ़ (Hanumangarh) के टिब्बी (Tibbi) क्षेत्र में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री (Ethanol Factory) के खिलाफ आंदोलन का मुद्दा लोकसभा (Lok Sabha) में उठा। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने पुलिस लाठीचार्ज की निंदा की।

बुधवार (11 दिसंबर) को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शून्यकाल में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने दमन से आंदोलित लोगों की आवाज को कुचलने का प्रयास किया।

लोकसभा में गूंजा इथेनॉल फैक्ट्री विवाद

सांसद बेनीवाल ने पुलिस लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने मांग की कि तत्काल प्रभाव से वहां के कलेक्टर और एसपी को एपीओ किया जाए।

बेनीवाल ने आरोप लगाया कि इस फैक्ट्री में राजस्थान से आने वाले किसी केंद्रीय मंत्री की भी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन ग्रामीण, किसान और सामाजिक संगठनों द्वारा किया जा रहा है।

प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम की आशंका

सांसद ने बताया कि सभी लोग इस इथेनॉल फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण, उपजाऊ भूमि के बड़े नुकसान और पानी की गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रासायनिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले धुएं और गैसों से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

बेनीवाल ने कहा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट पर लोगों की राय लिए बिना निर्णय लेना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि पुलिस लाठीचार्ज में 50 से अधिक किसान, एक विधायक और कई नेता घायल हुए हैं।

"पानी को जहर और हवा को धुआं बना सकती है फैक्ट्री"

आंदोलन को जायज ठहराते हुए बेनीवाल ने कहा कि जिस धरती ने अनाज, पानी और जीवन दिया, उस पर ऐसी फैक्ट्री थोपी जा रही है जो पानी को जहर, हवा को धुआं और मिट्टी को केमिकल बना सकती है। उन्होंने कहा कि इस इथेनॉल फैक्ट्री के अपशिष्ट से मिट्टी और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

साथ ही भू-जल प्रदूषण का खतरा भी बढ़ेगा। इस क्षेत्र में पहले ही पानी की समस्या है, ऐसे में औद्योगिक प्रदूषण स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आरोप

वहीं, भजनलाल सरकार में मंत्रियों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने इस पूरे आंदोलन को कांग्रेस प्रायोजित बताया।

उन्होंने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया। गोदारा ने यह भी कहा कि किसानों के लिए बातचीत के दरवाजे खुले हैं।

संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने आंदोलन की टाइमिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं, इसीलिए यह समय चुना गया।

किरोड़ी लाल मीणा ने किसानों से बातचीत की अपील करते हुए कहा कि अगर किसान नहीं आ सकते थे तो उन्हें धरनास्थल पर बुला लेते। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।