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राजस्थान

अफसर पर गंभीर आरोप: स्थगन आदेश के बावजूद 7 विक्रय पत्र पंजीकृत, अफसर पर आरोप

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर के उदयरामसर में आसोपा आश्रम ट्रस्ट की विवादित भूमि के मामले में नया मोड़। तत्कालीन उपपंजीयक पर स्थगन आदेश की अवहेलना कर 7 विक्रय पत्र पंजीकृत करने का आरोप लगा है।

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HIGHLIGHTS

  • बीकानेर में स्थगन आदेश के बावजूद विवादित भूमि के 7 विक्रय पत्र पंजीकृत करने का आरोप।तत्कालीन उपपंजीयक ताराचंद मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज।मामला उदयरामसर स्थित आसोपा आश्रम ट्रस्ट की करीब 589.15 बीघा भूमि से जुड़ा है।गंगाशहर थाने में 20 अगस्त 2026 को एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
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बीकानेर |  ग्राम उदयरामसर में स्थित आसोपा आश्रम ट्रस्ट की एक विवादित भूमि को लेकर तत्कालीन उपपंजीयक (प्रथम) xताराचंद मीणा पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने न्यायालय के स्थगन आदेशों की कथित तौर पर अवहेलना करते हुए एक ही दिन में सात विक्रय पत्र पंजीकृत कर दिए।

इस संबंध में उर्मिला आसोपा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की बीकानेर चौकी में शिकायत दर्ज कराकर मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायत के अनुसार, यह मामला उदयरामसर में स्थित आसोपा आश्रम ट्रस्ट की लगभग 589.15 बीघा भूमि से संबंधित है। इस भूमि के खसरा नंबर 1008, 1010/1, और 519/1 से जुड़े मामले राजस्थान राजस्व मंडल, अजमेर में विचाराधीन हैं।

शिकायतकर्ता ने बताया कि संबंधित जमाबंदी में वर्ष 2013 से ही स्थगन आदेश और रेफरेंस का इंदराज दर्ज है, जिसके तहत भूमि के हस्तांतरण पर स्पष्ट रूप से रोक लगी हुई है।

न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी का आरोप

आरोप है कि इन सभी स्थगन आदेशों के बावजूद, 20 जुलाई 2026 को एक ही दिन में सात विक्रय पत्रों का पंजीयन कर दिया गया।

शिकायत में तत्कालीन उपपंजीयक पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें जमाबंदी में दर्ज न्यायालयीन आदेशों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उनका पालन नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने वास्तविक कब्जे और खातेदारी की स्थिति की आवश्यक जांच भी नहीं करवाई।

विक्रेता एक, क्रेता अनेक

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विक्रय पत्रों में यह कथन दर्ज था कि भूमि पर कोई वाद विचाराधीन नहीं है, इसके बावजूद दस्तावेजों का पंजीयन कर दिया गया।

इन सातों विक्रय पत्रों में विक्रेता के रूप में दिलीप पुरी का नाम दर्ज है। वहीं, क्रेताओं में धीरज पुगलिया, अनुज जैन, नेहा जैन और यश पुगलिया के नाम शामिल हैं।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

शिकायतकर्ता ने वर्ष 2013 की एक पूर्व प्रशासनिक कार्रवाई का भी हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में पहले भी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, और तब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी।

एसीबी से जांच की मांग

इस मामले में गंगाशहर थाने में 20 अगस्त 2026 को एफआईआर संख्या 0224/2026 भी दर्ज हो चुकी है।

अब एसीबी से मांग की गई है कि तत्कालीन उपपंजीयक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और संबंधित सेवा नियमों के तहत गहन जांच कर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायत के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे जमाबंदी, स्थगन आदेश, विक्रय पत्र और एफआईआर की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।

*Edit with Google AI Studio

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