जयपुर |राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जारी प्रत्याशियों की सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस सूची में सबसे चर्चित नाम पूर्व महापौर डॉ. ज्योति खंडेलवाल का है, जिन्हें एक पार्षद पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।
पूर्व मेयर, अब पार्षद प्रत्याशी: BJP का बड़ा दांव ज्योति खंडेलवाल पार्षद उम्मीदवार घोषित
जयपुर की पूर्व मेयर डॉ. ज्योति खंडेलवाल अब पार्षद का चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आईं खंडेलवाल को किशनपोल के वार्ड 110 से टिकट मिला है, जिससे मेयर पद की दावेदारी की अटकलें तेज हो गई हैं।
HIGHLIGHTS
- जयपुर की पूर्व मेयर डॉ. ज्योति खंडेलवाल को भाजपा ने वार्ड पार्षद का टिकट दिया है।अक्टूबर 2023 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं खंडेलवाल।माना जा रहा है कि चुनाव जीतने पर वे मेयर पद की प्रबल दावेदार हो सकती हैं।2009 में वे सीधे चुनाव जीतकर जयपुर की पहली महिला मेयर बनी थीं।
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भाजपा की सूची में चौंकाने वाला नाम
कभी पूरे जयपुर शहर की कमान संभालने वाली और कांग्रेस के टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं कद्दावर नेता ज्योति खंडेलवाल को भाजपा ने किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 110 से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले अक्टूबर 2023 में ही कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
निवर्तमान मेयर का टिकट कटा
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भाजपा ने अपनी निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का टिकट काटकर ज्योति खंडेलवाल को चुनावी मैदान में उतारा है। इस अप्रत्याशित कदम ने सभी को चौंका दिया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
क्यों खेला भाजपा ने यह दांव?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा ने यह दांव जयपुर नगर निगम के आगामी बोर्ड में मेयर पद की कुर्सी पर नजरें टिकाकर खेला है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि खंडेलवाल की उम्मीदवारी से पार्टी को कई स्तरों पर फायदा हो सकता है।
- मजबूत व्यक्तिगत पकड़: किशनपोल और परकोटे के इलाके में ज्योति खंडेलवाल की व्यक्तिगत पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।
- विभिन्न वर्गों में पैठ: स्थानीय वैश्य समाज, व्यापारिक संगठनों और विशेषकर महिला मतदाताओं के बीच उनका सीधा जुड़ाव रहा है।
- आसपास के वार्डों पर प्रभाव: एक मजबूत चेहरे को वार्ड 110 से उतारकर भाजपा न केवल उस सीट पर जीत सुनिश्चित करना चाहती है, बल्कि आसपास के 4-5 वार्डों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालना चाहती है।
क्या फिर बनेंगी मेयर पद की दावेदार?
चर्चा यह भी है कि नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद यदि भाजपा का बोर्ड बनता है, तो ज्योति खंडेलवाल मेयर पद की सबसे प्रबल और अनुभवी दावेदार होंगी। उनका कद एक साधारण पार्षद से कहीं बड़ा है।
उनके पास 2009 से 2014 तक जयपुर नगर निगम चलाने का 5 साल का व्यावहारिक अनुभव है। वे शहर की प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं को बारीकी से समझती हैं। इसलिए भाजपा ने उन्हें पहले पार्षद का चुनाव जीतकर अपनी योग्यता साबित करने का मौका दिया है।
ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर
ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है। भाजपा में शामिल होने के बाद से ही वे संगठन के काम में सक्रिय थीं।
2009 में रचा था इतिहास
साल 2009 में जब राजस्थान में पहली बार मेयर पद के लिए सीधे चुनाव हुए थे, तब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर भाजपा की दिग्गज नेता सुमन शर्मा को 13,500 वोटों से हराकर इतिहास रचा था। वह जयपुर की पहली महिला मेयर बनी थीं।
अपने 5 साल के कार्यकाल के दौरान वे अपनी ही कांग्रेस सरकार के अधिकारियों और व्यवस्थाओं के खिलाफ भी मुखर रहीं, जिससे उनकी छवि एक भ्रष्टाचार विरोधी और निडर नेता के रूप में बनी।
लोकसभा चुनाव का अनुभव
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जयपुर संसदीय सीट से 48 सालों के लंबे इंतजार के बाद किसी महिला को प्रत्याशी बनाया था, और वह नाम ज्योति खंडेलवाल का ही था। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें भाजपा के रामचरण बोहरा से हार का सामना करना पड़ा था।
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