बीकानेर | राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविंद मेघवाल ने बीकानेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में एक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने 1 जुलाई, 2026 को एक विशाल और शांतिपूर्ण धरने की घोषणा की है, जिसमें सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
धार्मिक स्थल तोड़े, 1 जुलाई को धरना: पूर्व मंत्री मेघवाल का ऐलान: धार्मिक स्थल तोड़ने पर 1 जुलाई को धरना
बीकानेर में मस्जिदों-दरगाहों को तोड़ने के विरोध में पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल ने 1 जुलाई को विशाल धरने की घोषणा की है।
HIGHLIGHTS
- पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल ने 1 जुलाई को बीकानेर में विशाल धरने का ऐलान किया है।
- विरोध का कारण सीमावर्ती इलाकों में मस्जिद और दरगाहों को जमींदोज करना है।
- ज्ञापन में तोड़े गए स्थलों के पुनर्निर्माण और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की गई है।
- अयोध्या मंदिर में कथित लूट की जांच और स्थानीय लोगों के लिए भूमि पट्टों की भी मांग की गई है।
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मेघवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
क्या है पूरा मामला?
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ समय से बीकानेर के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन द्वारा मुस्लिम मस्जिदों और मजारों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 20 जून को खाजूवाला क्षेत्र की पूगल तहसील में कई धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की गई।
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इनमें ग्राम बांडका में स्थित दो करोड़ रुपये की लागत से बनी मस्जिद, पहलवान का बैरा में स्थित दरगाह और आडूरी में स्थित एक अन्य दरगाह शामिल है।
मेघवाल का दावा है कि इन संरचनाओं को बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के जमींदोज कर दिया गया।
सौहार्द को गहरी क्षति
उन्होंने कहा कि इस तरह की एकतरफा और मनमानी कार्रवाइयों से क्षेत्र के सदियों पुराने सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को गहरी क्षति पहुंची है।
इन घटनाओं के कारण पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है, जो कि चिंता का विषय है।
गांधीवादी तरीके से होगा महापड़ाव
मेघवाल ने चेतावनी दी है कि इस अन्याय के विरोध में 01 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे से बीकानेर कलेक्ट्री परिसर में एक विशाल और शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।
मेघवाल ने कहा, "हम सभी भारत के संविधान को अक्षुण्ण रखने का दृढ़ संकल्प लेते हुए गांधीवादी तरीके से यह महापड़ाव और धरना आयोजित कर रहे हैं।"
इस धरने का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है।
ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें
पूर्व मंत्री ने अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन भी प्रस्तुत किया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है।
पुनर्निर्माण और सुरक्षा की मांग
पहली और सबसे प्रमुख मांग यह है कि ग्राम बांडका में स्थित मस्जिद और पहलवान का बैरा व आडूरी में स्थित दरगाहों का पुनर्निर्माण प्रशासन द्वारा सरकारी स्तर पर सम्मानपूर्वक कराया जाए।
साथ ही, यह भी मांग की गई है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी अन्य धार्मिक स्थल को तोड़ने की किसी भी संभावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अयोध्या से लेकर बीकानेर तक जांच
ज्ञापन में अयोध्या में श्रीराम मंदिर में हुए 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच की भी मांग की गई है।
इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने या सीबीआई से जांच कराने का सुझाव दिया गया है। काशी और मथुरा जैसे अन्य बड़े धार्मिक स्थलों में भी वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
भूमि पट्टों की मांग
एक अन्य महत्वपूर्ण मांग बीकानेर जिले के उन धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए भूमि पट्टे जारी करने से संबंधित है, जिनके पास अभी तक स्वामित्व के कागजात नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आबादी भूमि पर बसे लोगों को स्वामित्व का अधिकार (पट्टा) देने की भी मांग की गई है, ताकि वे सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
इस विरोध प्रदर्शन से सीमावर्ती क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।
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