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राज्य

कलेक्टर की दरियादिली, पेंशन बहाल: 5 साल से बंद थी पेंशन, कलेक्टर खुद चैंबर से बाहर आए, दिए निर्देश

ललित पथमेड़ा

जालोर में 80 वर्षीय दृष्टिहीन महिला की 5 साल से बंद पेंशन कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद बहाल, दिए सभी योजनाओं का लाभ देने के निर्देश।

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HIGHLIGHTS

  • जालोर में 80 वर्षीय दृष्टिहीन महिला की सामाजिक सुरक्षा पेंशन 5 साल से बंद थी।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन में फिंगरप्रिंट स्पष्ट न आने के कारण पेंशन रोक दी गई थी।
  • जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे खुद चैंबर से बाहर आकर बुजुर्ग महिला से मिले।
  • कलेक्टर ने पेंशन तत्काल शुरू करने और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने के निर्देश दिए।
jalore collector helps 80 year old blind woman restart pension after 5 years

जालोर | राजस्थान के जालोर में एक 80 वर्षीय दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला की फरियाद पर जिला कलेक्टर ने जो संवेदनशीलता दिखाई, वह चर्चा का विषय बन गई है। पांच वर्षों से बंद पड़ी सामाजिक सुरक्षा पेंशन को कलेक्टर के एक निर्देश ने तत्काल बहाल करा दिया।

पांच साल का संघर्ष और कलेक्टर की एक मुलाकात

आहोर तहसील के जेतपुरा गांव की रहने वाली 80 वर्षीय कोकु देवी अपनी बंद पेंशन की गुहार लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची थीं।

बुढ़ापे और शारीरिक अक्षमता के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं और जमीन पर घिसटकर आगे बढ़ रही थीं।

उनकी यह हालत देखकर कलेक्ट्रेट के सुरक्षाकर्मी चैनाराम ने मानवता दिखाते हुए उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाया।

सुरक्षाकर्मी उन्हें सहारा देकर जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे के चैंबर तक ले गए, जहां से उनकी समस्या के समाधान का रास्ता खुला।

बायोमेट्रिक बनी बाधा, भटकता रहा परिवार

कोकु देवी की विधवा बेटी नाथुदेवी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनकी मां की पेंशन लगभग पांच साल पहले बंद हो गई थी।

इसका कारण बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान उनकी मां के फिंगरप्रिंट का स्पष्ट न आना था।

तब से लेकर आज तक, परिवार लगातार आहोर एसडीएम कार्यालय और तहसील के चक्कर काटता रहा, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले।

नाथुदेवी ने बताया कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। 20 साल पहले पिता और बाद में दोनों भाइयों का भी निधन हो गया।

अब घर में केवल महिलाएं और एक पोती ही बची हैं, जिनके लिए आजीविका चलाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

कलेक्टर ने दिखाई संवेदनशीलता, दिए तत्काल निर्देश

जैसे ही जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे को बुजुर्ग महिला के आने की सूचना मिली, वह स्वयं अपने चैंबर से बाहर आ गए।

उन्होंने गैलरी में ही कोकु देवी की पूरी बात धैर्य से सुनी और उनकी दयनीय स्थिति को समझा।

कलेक्टर ने तुरंत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोकु देवी की बंद पेंशन को तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए।

इसके अलावा, उन्होंने लंबित दस्तावेजों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार करने और आवास योजना सहित सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने को कहा।

"वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का हो तत्काल समाधान"

कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे ने कहा, "मामले का निस्तारण कर दिया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बुजुर्ग महिला की पेंशन जल्द शुरू कराई जाए। साथ ही भविष्य में भी वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनकर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।"

जिला कलेक्टर की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई से न केवल कोकु देवी के परिवार को एक बड़ी राहत मिली है, बल्कि यह सुशासन और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। इस कदम से सरकारी तंत्र में आमजन का विश्वास और मजबूत हुआ है।

*Edit with Google AI Studio

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