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कुरुक्षेत्र में खौफनाक सामूहिक सुसाइड: कुरुक्षेत्र में दिल दहला देने वाली वारदात: बीमार बेटी के साथ माता-पिता ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बयां किया दर्द

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हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक दंपति ने अपनी 3 साल की बीमार बेटी के साथ फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें बच्ची की बीमारी का जिक्र है।

HIGHLIGHTS

  • कुरुक्षेत्र के प्रेम नगर में माता-पिता और 3 साल की बेटी ने फांसी लगाकर जान दी।
  • मृतक जतिंद्र कुमार रेलवे मेल सर्विस में कार्यरत थे और उनके पिता रिटायर्ड पुलिसकर्मी थे।
  • शुरुआती जांच में पता चला कि बेटी लकवे जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी।
  • पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है।
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कुरुक्षेत्र | हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शहर की प्रेम नगर कॉलोनी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शव घर के अंदर फंदे से लटके हुए पाए गए। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी महज तीन साल की मासूम बेटी शामिल है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और सन्नाटे का माहौल पसरा हुआ है।

घटना का प्रारंभिक विवरण

सोमवार की सुबह कुरुक्षेत्र के प्रेम नगर इलाके के लिए किसी खौफनाक सपने जैसी थी। पुलिस को सुबह करीब 6:30 बजे सूचना मिली कि एक घर में तीन लोगों ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही सुभाष मंडी पुलिस चौकी की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जब पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी पुलिसकर्मियों की भी रूह कांप गई। कमरे के अंदर पंखे से तीन शव लटक रहे थे।

मृतकों की पहचान और पृष्ठभूमि

मृतकों की पहचान 30 वर्षीय जतिंद्र कुमार, उनकी 28 वर्षीया पत्नी मंजू और उनकी 3 साल की बेटी अदविका के रूप में हुई है। जतिंद्र कुमार रेलवे मेल सर्विस (RMS) में कार्यरत थे। वह एक शिक्षित और जिम्मेदार व्यक्ति माने जाते थे। उनके पिता महेंद्र सिंह पंजाब पुलिस से सेवानिवृत्त हुए थे, जिनका करीब छह महीने पहले ही निधन हो गया था। परिवार में अब जतिंद्र की मां बिमला देवी ही बची हैं। जतिंद्र का एक भाई प्रतीक भी है, जो वर्तमान में कनाडा में अपने परिवार के साथ रहता है।

कैसे हुआ इस दर्दनाक घटना का खुलासा?

इस घटना का पता तब चला जब जतिंद्र के एक करीबी रिश्तेदार को उनके मोबाइल से एक संदेश प्राप्त हुआ। जतिंद्र ने सुसाइड करने से पहले संभवतः यह मैसेज भेजा था। मैसेज मिलते ही रिश्तेदार घबरा गए और तुरंत पुलिस को सूचित किया। जब पुलिस और पड़ोसी मौके पर पहुंचे, तो घर की पहली मंजिल का कमरा अंदर से बंद था। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर जतिंद्र, मंजू और अदविका के शव लटक रहे थे।

आत्महत्या के पीछे की संभावित वजह

पुलिस की शुरुआती जांच और घटनास्थल से मिले संकेतों के मुताबिक, इस आत्मघाती कदम के पीछे मासूम बेटी की बीमारी मुख्य कारण बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि 3 साल की अदविका जन्म से ही या पिछले कुछ समय से लकवे जैसी किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। माता-पिता अपनी लाडली की इस हालत को देखकर लंबे समय से गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में थे। वे अपनी बेटी को तड़पते हुए नहीं देख पा रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई और सुसाइड नोट

थाना कृष्णा गेट के एसएचओ बलजीत सिंह ने बताया कि मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। पुलिस इस सुसाइड नोट की गहनता से जांच कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल भेज दिया है। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि किसी भी तरह की साजिश की आशंका को खारिज किया जा सके।

इलाके में शोक की लहर

प्रेम नगर कॉलोनी के निवासी इस घटना से स्तब्ध हैं। पड़ोसियों का कहना है कि जतिंद्र का परिवार बहुत ही मिलनसार था। हालांकि, पिछले कुछ समय से वे बेटी की बीमारी के कारण काफी परेशान और चुपचाप रहने लगे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि वे इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठा लेंगे। एक हंसता-खेलता परिवार इस तरह उजड़ जाएगा, यह सोचकर ही हर कोई गमगीन है।

बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि जब कोई परिवार किसी लंबी बीमारी से जूझ रहा होता है, तो उन्हें किस तरह के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समर्थन की आवश्यकता होती है। अक्सर गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च और मरीज की पीड़ा परिवार को मानसिक रूप से तोड़ देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में काउंसलिंग और सामाजिक सहयोग बहुत जरूरी होता है।

कनाडा में रह रहे भाई को दी गई सूचना

जतिंद्र के भाई प्रतीक, जो कनाडा में रहते हैं, उन्हें इस दुखद घटना की जानकारी दे दी गई है। परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जतिंद्र की मां बिमला देवी पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। छह महीने पहले पति को खोने के बाद अब बेटे, बहू और पोती की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है।

रेलवे मेल सर्विस में शोक

जतिंद्र के सहकर्मियों ने उन्हें एक मेहनती और ईमानदार कर्मचारी के रूप में याद किया। रेलवे मेल सर्विस के दफ्तर में भी इस खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथियों का कहना है कि जतिंद्र अक्सर अपनी बेटी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं जताया कि वे इतना आत्मघाती फैसला ले सकते हैं।

जांच के विभिन्न पहलू

पुलिस अब इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है। क्या परिवार पर कोई आर्थिक दबाव भी था? क्या सुसाइड नोट में किसी और का भी जिक्र है? इन सभी सवालों के जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग एनालिसिस के बाद ही साफ हो पाएंगे। फिलहाल पुलिस ने धारा 174 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

समाज के लिए एक चेतावनी

यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास रहने वाले लोग कितनी भी बड़ी मुश्किल में क्यों न हों, हमें एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव या अवसाद के लक्षण दिखा रहा है, तो उससे बात करना और उसे पेशेवर मदद के लिए प्रेरित करना जीवन बचा सकता है। कुरुक्षेत्र की यह घटना एक प्रशासनिक और सामाजिक विफलता की ओर भी इशारा करती है जहां एक परिवार को मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आया।

अंतिम संस्कार की तैयारी

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया जाएगा। जतिंद्र के भाई के भारत पहुंचने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। पूरा शहर इस समय उस मासूम अदविका के लिए आंसू बहा रहा है, जिसकी जिंदगी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई।

निष्कर्ष और पुलिस का बयान

एसएचओ बलजीत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुखद मामला है। प्राथमिक दृष्टि में यह बीमारी से तंग आकर किया गया सुसाइड ही लग रहा है। हम सुसाइड नोट के हर शब्द की जांच कर रहे हैं। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ है और मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी।

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