ये परियोजना राजधानी जयपुर के लिए सबसे अहम होगी, क्योंकि लगातार बढ़ते जयपुर के अधिकतर क्षेत्र को पानी उपलब्ध हो सकेगा।
जल संसाधन विभाग इस प्रोजेक्ट में तेजी दिखाते हुए आगे बढ़ रहा है।
अब जल संसाधन विभाग जल्द ही दोनो बांधों को लिंक करने का काम भी शुरू करेगा।
ईस्टन राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट से 13 जिलों को पानी पिलाने के लिए गहलोत सरकार की ये कवायद राजस्थान के लिए बेहद ही उपयोगी साबित होगी।
इस परियोजना को मूर्तरूप देने के जरिए 6 बैराज और 1 बांध का निर्माण किया जाएगा।
जिसके अंतगर्त नवनेरा, मेज, कुन्नू बैराज, रामगढ, महलपुर, राठौड में बैराज बनाया जाएगा और बनास नदी पर सवाईमाधोपुर में डूंगरी बांध का निमार्ण किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत बीसलपुर बांध की क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा ताकि, बांध का पानी व्यर्थ न बहे और अधिक पानी जमा किया जा सके।
ऐसे में बांध की क्षमता 0.50 मीटर बढ़ाई जाएगी ताकि बांध में 3 टीएमसी पानी की मात्रा बढ़ाई जा सके। इस प्रोजेक्ट में करीब 37 हजार 247 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
आपको बता दें कि, बीसलपुर बांध में मुख्य रूप से बनास, खारी व डाई नदियों का जलबहाव क्षेत्र आता है। जब प्रदेश के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, अजमेर जिलों में बारिश होती है तब बीसलपुर बांध में पानी की आवक होती है ।
सरकार के इस प्रोजेक्ट के धरातल पर आने के साथ ही राजधानी जयपुर के आस-पास के सभी इलाकों फागी, सांगानेर, बस्सी, फुलेरा, मोजमाबाद, चाकसू आदि को भी पेय जल की सप्लाई हो सकेगी।
ये 13 जिले रहेंगे शामिल
ईस्टन कैनाल से सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, झालावाडा, बांरा, कोटा, बूंदी, करौली, अलवर, भरतपुर, धौलपुर के लिए योजना बनाई है।
अभी बीसलपुर बांध से अजमेर, जयपुर, टोंक को पेयजल की सप्लाई की जा रही है।