गौरतलब है कि, कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले रिलीज हुई फिल्म ’द केरला स्टोरी’ पर भी जमकर बवाल मचा था और कई राज्यों में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक भी लगाई गई थी।
अब राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले फिल्म ’अजमेर 92’ को लेकर विवाद गहराता जात रहा है।
अजमेर दरगाह से जुड़े प्रतिनिधियों ने किया इनकार
भले ही ’मदारिया सूची फाउंडेशन’ संगठन की ओर से फिल्म निर्माताओं को लीगल नोटिस भेजा गया हो, लेकिन अजमेर दरगाह से जुड़े प्रतिनिधियों ने ऐसी किसी संस्था को जानने से इनकार कर दिया है।
क्या कहा गया है लीगल नोटिस में ?
’अजमेर 92’ फिल्म को पोस्टर हाल ही में जारी हुआ है। जिसको लेकर नाराजगी जताते हुए लीगल नोटिस जारी कर फाउंडेशन के समीर बोगानी ने कहा है कि फिल्म के पोस्टर में आपत्तिजनक, गलत व भ्रामक जानकारी दी गई है।
पोस्टर में साल 1992 में 250 कॉलेज छात्राओं के यौनशोषण की घटना का शिकार होने और 28 परिवारों के रातों-रात गायब होने की जानकारी दी गई है।
नोटिस में कहा गया है कि इस घटना में अभियुक्त और पीड़ित दोनों ही विभिन्न समुदायों से हैं।
इस घटना में 28 परिवारों के रातों-रात गायब होने का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
ऐसे में इस नोटिस में मांग की गई है कि फिल्म निर्माता सही तथ्यों को पेश करें और मनगढ़ स्क्रिप्ट को हटाए।
इसमें अजमेर शरीफ दरगाह से संबंधित दृश्यों और सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को भी हटाने की मांग की गई है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के पोस्टर के माध्यम से लोगों में सनसनी पैदा कर फिल्म की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।
ऐसे में इन सभी बातों पर गौर फरमाया जाए और मनगढ़त तथ्यों को हटाकर सही तथ्यों को दिखाया जाए।