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राजस्थान

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने राजस्थान के जवानों की वीरता को सराहा और भविष्य के युद्ध की चुनौतियों पर की बात

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जयपुर में सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने सैनिकों के शौर्य की प्रशंसा की और आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर दिया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान के सैनिकों ने देश की रक्षा में हमेशा इतिहास रचा है। भविष्य के युद्धों के लिए सेना आधुनिक तकनीक और बदलाव अपना रही है। रूस और यूक्रेन के युद्ध से सेना ने ड्रोन और तकनीक के महत्व को सीखा है। भारतीय सेना स्वदेशी हथियारों के साथ पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में है।
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी

जयपुर | थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश और दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में राजस्थान के सैनिक सबसे ज्यादा बहादुर हैं और उन्होंने हमेशा इतिहास रचा है।

जनरल द्विवेदी ने सेना की परंपरा और आधुनिक बदलावों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाई में तकनीक का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा और सेना इसके लिए तैयार है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सैनिकों के परिवारों की देखभाल की जिम्मेदारी उठाएं। नागरिकों के सहयोग से ही सीमा पर तैनात सैनिकों का मनोबल ऊंचा रहता है।

आर्मी चीफ ने कहा कि फौजी कभी रिटायर नहीं होता है और उनमें कई विशेष खूबियां होती हैं। इन खूबियों को दुनिया के सामने लाने के लिए ही नए अवार्ड्स की शुरुआत की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में कई बार सैनिकों के योगदान का जिक्र किया है। सैनिक देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आधुनिक युद्ध और तकनीक के सबक

आर्मी चीफ ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस युद्ध से सेना ने ड्रोन और छोटी टुकड़ियों की सफलता के बारे में बहुत कुछ सीखा है।

आज के समय में ड्रोन 800 किलोमीटर दूर तक मार करने की क्षमता रखते हैं। युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए सेना में कई नए संगठनों का गठन किया जा रहा है।

बदलाव की यह प्रक्रिया सेना में लगातार जारी रहेगी ताकि किसी भी स्थिति का सामना किया जा सके। युद्ध में बहुत तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं इसलिए हमें हर हालात के लिए तैयार रहना होगा।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक

जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज के युद्ध की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती है। यह लड़ाई कुछ दिनों से लेकर कई सालों तक भी चल सकती है।

सेना अब विदेशी तकनीक के बजाय स्वदेशी उपकरणों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। भारत को अनुसंधान के क्षेत्र में और अधिक मजबूत होने की जरूरत है।

रिसर्च के बिना हम पूरी तरह से श्रेष्ठ नहीं हो सकते हैं। भारतीय सेना अब पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।

पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए प्रोपेगेंडा पर भी आर्मी चीफ ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमारा सकारात्मक प्रोपेगेंडा दुश्मन के झूठ से सौ गुना ज्यादा प्रभावी है।

सेना अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मीडिया के माध्यम से सही सूचनाएं साझा करती है। हम हर समय देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।

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