सोमवार को सचिन पायलट की जनसंघर्ष यात्रा के समापन पर गहलोत सरकार के ही मंत्रियों और विधायकों ने अपनी ही सरकार का भ्रष्टाचारी बता दिया।
आपसे में उलझ रहे गहलोत सरकार के नेताओं से राजस्थान ही नहीं बल्कि दिल्ली तक आलाकमान परेशान दिख रहे हैं।
एक और कर्नाटक सीएम को लेकर बगावती बिगुल बजता नजर आ रहा हैं तो वहीं दूसरी ओर, राजस्थान में बगावत शुरू हो चुकी हैं।
राजस्थान में सचिन पायलट के पांच सालों के संघर्ष को कांग्रेस के कई नेता पार्टी विरोधी गतिविधि बता चुके हैं, जबकि कई सदस्यों ने इसे पायलट की अनुशासनहीनता करार दिया है।
सरकार पर नहीं खुद पर भी लगा रहे आरोप
इसी बीच गहलोत गुट मेें शामिल और सरकार में जलदाय मंत्री महेश जोशी ने भी सचिन पायलट को निशाने पर लिया है।
महेश जोशी ने कहा है कि अत्यंत आश्चर्यजनक और खेदजनक है कि कुछ जिम्मेदार लोग अपनी ही सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अपनी ही सरकार पर आरोप लगाने से पहले उन्हें ये सोचना था कि वे ये आरोप खुद पर भी लगा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आरोप लगाने वालों को ये अच्छी तरह से ज्ञात है कि जब भी भ्रष्टाचार की बात सामने आई है, तब-तब मुख्यमंत्री जी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सशक्त धावा बोला है।
भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एसीबी की कार्रवाइयां इस बात की गवाह हैं।
आपको बता दें कि सचिन पायलट ने गहलोत सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
उन्होंने सरकार के सामने 3 मांगों को रखा है और साफ-साफ कहा है कि अब याचना नहीं रण होगा और पूरे राजस्थान में उग्र आंदोलन होगा।