डीएचएफ यानि दाऊद हनीफ पिनारा फाउंडेशन के प्रमुख जमीनों की कीमत से ज्यादा कीमत शिक्षा की मानते हैं। मिडल ईस्ट में व्यवसाय करने वाले दाऊद हनीफ पिनारा "थिंक 360 " से बातचीत में कहते हैं -"क्वालिटी एजुकेशन वक्त की जरूरत है। हमारी कोशिश उसके लिए हर संभव सहयोग की है। " पिनारा का फाउंडेशन एक तरफ शिक्षा की गुणवत्ता की खातिर शिक्षण संस्थानों की बेहतरी के लिए काम कर रहा है तो दूसरी तरफ जरूरतमंद बच्चों को स्कॉलरशिप देकर उनके उच्च शिक्षा के लिए दरवाजे भी खोल रहा है।
शेखावाटी ने निकलने चाहिए रामानुजन जैसे गणितज्ञ
पिनारा कहते हैं -"हमारी चाहत है कि इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले बच्चे इंजिनियर ही बनें ,क्लर्क नहीं। फाउंडेशन का जमीनी काम देखने वाले श्रीराम थालौर के मुताबिक स्कॉलरशिप हासिल करने वाले बच्चों में सभी समुदायों और वर्गों के जरूरतमंद शामिल हैं। पिनारा परिवार इस इलाके में शिक्षा ही नहीं ,बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। यानि अठारहवीं सदी की शुरुआत में जो सपना पहली महिला शिक्षक फातिमा शेख ने देखा था ,वह फहमीदा और उनका परिवार पूरा करने में जुटा है। और ,सपना यह कि इलाके से श्रीनिवास रामानुजन जैसे गणितज्ञ भी निकलें तो दिवंगत राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिक भी। पुनिता अरोड़ा जैसी सैन्य अधिकारी भी निकलें तो वंदना शिवा जैसी पर्यावरणविद भी।