इनलैंड पोर्ट के निर्माण को लेकर पिछले महीने मुंबई में राजस्थान रिवर बेसिन एवं जल संसाधन आयोजना प्राधिकरण और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, केंद्र सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस एमओयू के तहत गुजरात और राजस्थान में ड्रेजिंग (गाद निकालने) के माध्यम से अरब सागर से जालोर को जोड़ा जाएगा, जिससे राजस्थान समुद्री कनेक्टिविटी के एक नए युग में प्रवेश करेगा। जवाई-लूनी-रन ऑफ कच्छ नदी प्रणाली को राष्ट्रीय जलमार्ग-48 घोषित किए जाने के बाद जालोर में इनलैंड पोर्ट (वाटर-वे) विकसित करने की दिशा में यह सबसे बड़ा और निर्णायक कदम है।
कांडला पोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी
यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान को प्रत्यक्ष रूप से कांडला पोर्ट (कच्छ) से जोड़ देगी। वर्तमान में जालोर तक जलमार्ग बनाने के लिए विभिन्न रास्तों पर गहन अध्ययन किया जा रहा है, जिसमें भवातरा-नवलखी मार्ग कांडला क्रिक (लगभग 262 किलोमीटर) मार्ग भी शामिल है। एमओयू के अनुसार, इस परियोजना में ड्रेजिंग पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय होगी, जो इसकी विशालता और महत्व को दर्शाता है।
आईआईटी मद्रास द्वारा सर्वेक्षण
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि जलमार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग विकास प्राधिकरण, नेशनल टेक्नोलॉजी फॉर पोर्ट, वाटर-वे एंड कोस्ट, आईआईटी मद्रास और जल संसाधन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण में वर्षभर जल की उपलब्धता, परियोजना के लिए आवश्यक भूमि और अनुमानित लागत पर गहन अध्ययन हो रहा है। फील्ड स्टडी के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ जल्द ही राजस्थान का दौरा करेंगे। जल संसाधन विभाग राजस्थान, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और आईआईटी मद्रास के बीच नियमित संवाद के माध्यम से परियोजना की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जालोर बनेगा लॉजिस्टिक हब
रावत ने आगे बताया कि लूनी-जवाई बेसिन और जालोर-बाड़मेर क्षेत्र में कपड़ा, पत्थर, कृषि उत्पाद, ऑयलशीड, ग्वार, दालें और बाजरा जैसी बड़ी व्यापारिक गतिविधियां होती हैं। इसके अतिरिक्त, रिफाइनरी परियोजना भी इस क्षेत्र के नजदीक ही स्थित है। समुद्री कनेक्टिविटी मिलने से इन उद्योगों का विस्तार तेजी से होगा। कार्गो का एक बड़ा हिस्सा जलमार्ग से होने के कारण सड़क और रेल परिवहन पर भार कम होगा, जिससे माल ढुलाई क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।
भारी एवं बड़े आकार के माल की आवाजाही सरल होगी, जिससे नई इंडस्ट्री स्थापित होने के रास्ते खुलेंगे। साथ ही, वेयर हाउसिंग, पोर्ट सेवाएं, कोल्ड स्टोरेज और इंडस्ट्रियल क्लस्टर भी विकसित होंगे, जो क्षेत्र के समग्र विकास को गति प्रदान करेंगे।
50 हजार से अधिक रोजगार के अवसर
वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज की एक प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट) के अनुसार, इस परियोजना से राजस्थान और गुजरात सहित आसपास के क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इनलैंड पोर्ट के निर्माण से अब निवेशकों की नजरें भी प्रदेश की ओर हैं, जो राज्य में और अधिक निवेश आकर्षित करेगा।
इंडिया मैरीटाइम वीक, 2025 में एमओयू
मुंबई में 28 अक्टूबर को आयोजित इंडिया मैरीटाइम वीक, 2025 के दौरान इस महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर राजस्थान रिवर बेसिन एवं जल संसाधन आयोजना प्राधिकरण के मुख्य अभियंता राजपाल सिंह और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, वित्त (सदस्य) के के.के. नाथ उपस्थित थे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समुद्री व्यापार में संकल्प से सिद्धि की ओर राजस्थान
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी और मजबूत औद्योगिक विकास की सोच से यह परियोजना सरकार की प्राथमिकता में रही है। शर्मा द्वारा केंद्र सरकार स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकें कर इसे आगे बढ़ाया गया है। औद्योगिक विकास की दृष्टि से यह परियोजना संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ता एक महत्वपूर्ण कदम है। जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता सूची में यह परियोजना हमेशा शीर्ष पर है। नियमित निगरानी के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और केंद्र सरकार से निरंतर संवाद कर समन्वय स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि राजस्थान भी समुद्री राज्यों में शामिल हो सकेगा।”