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राजस्थान

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ श्री राजपूत करणी सेना ने खोला मोर्चा, राजस्थान विधानसभा घेराव की दी चेतावनी

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महिपाल सिंह मकराना ने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण विरोधी बताते हुए राजस्थान विधानसभा घेराव और भारत बंद की चेतावनी दी है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 श्री राजपूत करणी सेना ने यूजीसी के नए नियमों का पुरजोर विरोध किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने इसे सवर्ण विरोधी काला कानून बताया है। संगठन ने राजस्थान विधानसभा घेराव और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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जयपुर | विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा पेश किए गए नए नियमों को लेकर देशव्यापी विरोध के बीच राजस्थान में भी सियासत गरमा गई है। श्री राजपूत करणी सेना ने इन नियमों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

सवर्ण विरोधी बताया गया नया नियम

महिपाल सिंह मकराना ने यूजीसी के नए प्रावधानों को पूरी तरह से सवर्ण विरोधी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियमों की आड़ में सवर्ण समाज के लोगों और विशेषकर युवाओं का उत्पीड़न किया जाएगा। मकराना ने कहा कि यह एक ऐसा काला कानून है जो समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करने का काम करेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी वर्ग ने ऐसे कानून की मांग ही नहीं की थी, तो इसे थोपा क्यों जा रहा है?

विधानसभा घेराव की तैयारी

विरोध प्रदर्शन को धार देने के लिए करणी सेना ने राजस्थान विधानसभा के घेराव की योजना बनाई है। मकराना ने बताया कि आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए बुधवार सुबह 11 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सवर्ण समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों से चर्चा कर विधानसभा घेराव की तारीख तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो सवर्ण समाज पूरे देश में भारत बंद की घोषणा करेगा।

बिना जांच जेल भेजने पर जताई आपत्ति

करणी सेना के अध्यक्ष ने नियमों के उस हिस्से पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें बिना जांच के जेल भेजने और मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। मकराना ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ समाज को एकजुट करने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे कानून लाकर समाज को बांटने का काम किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि हक की लड़ाई के लिए करणी सेना सड़कों पर उतरेगी और जरूरत पड़ने पर उग्र आंदोलन भी किया जाएगा।

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