देशभर में 33 वारदातों को अंजाम
इस शातिर गिरोह ने अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 33 चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। राजस्थान के अलावा कई अन्य राज्यों में भी इनका नेटवर्क सक्रिय रूप से फैला हुआ था।
पिछले महीने कोटा में चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के मालिक के घर में हुई चोरी के बाद पुलिस काफी सक्रिय हुई। राजकुमार मित्तल और अशोक कुमार के घरों से भारी मात्रा में नकदी और जेवरात चोरी किए गए थे।
सीसीटीवी फुटेज से मिली सफलता
पुलिस ने इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए लगभग 600 किलोमीटर के दायरे में लगे 1500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। एक संदिग्ध कार पर मध्य प्रदेश की नंबर प्लेट दिखने के बाद जांच की दिशा काफी स्पष्ट हो गई थी।
तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस को आरोपी कार और मुख्य अपराधियों की पहचान करने में बड़ी मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की।
भेष बदलकर की गई रैकी
आरोपियों को पकड़ने के लिए कोटा पुलिस के जवानों ने अपनी पहचान बदलकर कई दिनों तक कठिन रैकी की। टीम के सदस्य फल-सब्जी विक्रेता, मैकेनिक और ढाबा कर्मचारी बनकर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
कोटा पुलिस की टीम ने धार, राजगढ़ और इंदौर समेत कई शहरों में छापेमारी की। पुलिसकर्मियों ने लगभग 15 दिनों तक अपनी पहचान छुपाकर अपराधियों के ठिकानों के आसपास डेरा डाले रखा था।
भगवान को भी चढ़ाया हिस्सा
जांच में एक दिलचस्प बात सामने आई कि चोरी करने के बाद आरोपी चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर गए थे। वहां उन्होंने अपनी चोरी की गई राशि का एक हिस्सा भगवान के चरणों में दान के रूप में अर्पित किया था।
मुख्य आरोपी करण भील को इंदौर में एक कार के साथ संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए पकड़ा गया था। उसकी निशानदेही पर संजय, मानसिंह और महेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
ज्वेलर्स भी पुलिस की गिरफ्त में
पुलिस ने न केवल चोरों को पकड़ा बल्कि चोरी के आभूषण खरीदने वाले ज्वेलर्स को भी धर-दबोचा है। फिलहाल सभी आरोपियों से पुलिस रिमांड में गहन पूछताछ की जा रही है ताकि अन्य वारदातों का पता चल सके।
इस बड़ी सफलता से कोटा पुलिस ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए अभी भी जांच जारी है।