दरअसल, राजस्थान में नए जिलों की तरह ही नए प्रदेश के मांग भी काफी लंबे समय से चली आ रही है।
पिछले कई सालों से मरूभूमि (रेगिस्तान क्षेत्र) के पर्याप्त विकास के लिए उसे अलग करने लगातार मांग उठती रही है।
अब जब सीएम गहलोत ने राज्य को 19 नए जिले दे दिए तो, लोगों का मानना है कि, सीएम गहलोत ’मरुप्रदेश’ के लिए भी कोई गेम खेल सकते हैं।
आपको बता दें कि, इससे पहले राजस्थान में नए जिलों का गठन करीब 17 साल पहले 2008 में वसुंधरा राजे के शासन में हुआ था और राज्य को प्रतापगढ़ के रूप में नया जिला मिला था। जिसके बाद राज्य में जिलों संख्या बढ़कर 33 हो गई थी।
सीएम गहलोत के अप्रत्याशित फैसलों को देखते हुए ये कहना भी गलत नहीं होगा कि चुनावों से पहले गहलोत साब एक बार फिर से चौंकाने वाला ऐलान करते हुए नए राज्य के गठन का बड़ा फैसला ले सकते हैं।
आपको बताना चाहेंगे कि, 13 जिलों को अलग करके मरुप्रदेश बनाने की मांग को लेकर मरुप्रदेश निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष जयवीर गोदारा ने गंगानगर के धानमंडी से एक महायात्रा निकाली थी साथ ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
मरुप्रदेश की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि, मरुप्रदेश बनने के बाद इन पिछड़े जिलों का विकास आसानी से हो सकेगा। विकास के नए आयाम खुलेंगे।
जिससे गांव व ढाणियों में भी बेहतर सड़के, खेल मैदान, स्कूल, चिकित्सा व बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो सकेगा।
अब अगर मान लिया जाए कि सीएम गहलोत राजस्थान को दो हिस्सों में बंटकर मरुप्रदेश का ऐलान करते हैं तो राजस्थान का स्वरूप कैसा होगा।
मरुप्रदेश के दायरे में करीब सवा 2 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल आता है।
ऐसी स्थिति में पश्चिमी राजस्थान अलग प्रदेश के रूप में सामने आ सकता है। जिसमें सभी रेतीले क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं।
अब जब राजस्थान में 50 जिले होने जा रहे हैं तो मरुप्रदेश में नए घोषित किए गए जिलों सांचोर, बालोतरा, फलौदी, जोधपुर पूर्व और पश्चिम, अनूपगढ़, डीडवाना कुचामन को भी शामिल किया जा सकता है। राजस्थान का क्षेत्रफल 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर है जहां 7 करोड़ जनसंख्या निवास करती है। जनसंख्या की दृष्टि से भारत का आठवां, भू-भाग की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है।