तत्पश्चात विद्यालय के छात्रों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला छूट पड़ी, जिसमें वंदन, भावनृत्य, लोकनृत्य, क्लासिकल नृत्य, शिक्षाप्रद नाटक, वनवासी नृत्य, गैर नृत्य, भक्ति नृत्य भाषण, कॉमेडी, मेलोडी डाँस सहित एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों का मंचन हुआ।


मंच संचालन ख्यातिलब्ध संचालक मीठालाल जी जांगिड ने किया तथा अतिथियों के साथ देर रात तक समां बांध दिया। इस बीच पूर्व छात्रों और शिक्षकों का सम्मान एवं उद्बोधन तथा अतिथियों का बहुमान भी हुआ। सभी को राम कि छवि अर्पित की गई।


महंत लहरभारतीजी महाराज ने छात्रों को जीवन में शिक्षा और संस्कारों का महत्व समझाया। आप ने दर्शाया कि शिक्षकों को अपनी सुविधाओं का त्याग करके भी बालकों के भविष्य को संवारने हेतु समर्पित हो जाना चाहिए। पूज्य महंत सनातन गिरिजी महाराज का पावन सानिध्य भी प्राप्त हुआ। लोकप्रिय पूर्व विधायक नारायणसिंह जी देवल ने शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय के योगदान की प्रशंसा करते हुए बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की।

लुम्बारामजी चौधरी ने आयोजन की सराहना करते हुए विद्यालय की उपलब्धियों और श्रेष्ठ समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
