जयपुर | राजस्थान के परिवहन विभाग में लंबे समय से चर्चित थ्री-डिजिट घोटाले में आखिरकार पहली एफआईआर दर्ज हो गई है। जयपुर के गांधीनगर थाने में आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत के जरिए दायर की गई इस प्राथमिकी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। यह पूरा मामला सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर वीआईपी और मनचाहे नंबरों के फर्जी आवंटन से जुड़ा हुआ है। इस भ्रष्टाचार के खुलासे ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर जाली दस्तावेज तैयार किए और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। इन्होंने मनमाने तरीके से खास नंबरों का आवंटन किया जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व का भारी नुकसान हुआ। इस मामले के तहत कुल 39 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब इन आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
राजस्व को लगी बड़ी चपत
इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी रिकॉर्ड में अवैध हेराफेरी की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर थ्री-डिजिट नंबरों का आवंटन किया। अपने पद का दुरुपयोग कर जाली रिकॉर्ड तैयार किए गए जिसके कारण राजकोष को करीब 500 करोड़ रुपये की भारी हानि पहुंची है। यह घोटाला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार पूरे राज्य से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।